ऑस्कर की रेस में शामिल फिल्म 'जल्लीकट्टू' के एक्टर सबुमोन अब्दुस्समद विवादों में घिर गए हैं। उन पर ट्रांसफोबिक डिस्कशन यानी ट्रांसजेंडर्स के खिलाफ ग्रुप में चर्चा करने का आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मलयाली एक्टर सबुमोन ने शुक्रवार रात कोच्चि के क्लब हाउस में ये चर्च रखी थी और इसमें उनका सवाल था कि क्या ट्रांसवुमन भी वाकई महिला होती हैं?
इस चर्चा में करीब 300 लोग शामिल हुए थे और इनमें कुछ महिलाएं और 15 ट्रांसजेंडर्स भी मौजूद थे। इस दौरान जब अब्दुस्समद ने ट्रांसजेंडर्स के खिलाफ कमेंट किया तो केरल की ट्रांसजेंडर कम्युनिटी नाराज हो गई। जल्द ही उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी भी की जा रही है।
ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट शीतल श्याम, जो कि केरल ट्रांसजेंडर्स जस्टिस कमेटी के बोर्ड मेंबर में शामिल हैं, उन्होंने कहा, 'अब्दुस्समद ने चर्चा के दौरान ट्रांसजेंडर्स को नीचा दिखाया। अब्दुस्समद ने कहा कि इन्हें महिलाएं नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इनमें XY क्रोमोजोम्स नहीं होते हैं। एक अन्य व्यक्ति ने डिस्कशन में गलत शब्दों का इस्तेमाल किया, जो कि नहीं किया जाना था।'
ट्रांसवुमन ने अब्दुस्समद से ग्रुप का टाइटल चेंज करने के लिए भी कहा, क्योंकि ये उन ट्रांसपर्सन के लिए असंवेदनशील था, जो खुद को महिला दिखाना चाहते हैं। वो लगातार हमें नीचा दिखाते रहे और जब विरोध किया गया तो हमसे ग्रुप छोड़ने के लिए कहा। अब्दुस्समद ने कहा कि उन्होंने ग्रुप बनाया है और वो जो चाहे कर सकते हैं।
शीतल श्याम ने आरोप लगाया है कि, 'ट्रांस-कम्युनिटी को भड़काने के लिए अब्दुस्समद ने उसी रात लगभग 11 बजे एक और ग्रुप बनाया, जिसका टाइटल था 'शिखण्डी एन्नु विल्लीकुन्नधु कुट्टम अनो?' (क्या ट्रांसपर्सन को शिखंडी कहना गलत है?)' बता दें, शिखण्डी एक ऐसा शब्द है जो बताता है कि ट्रांस पर्सन न तो पुरुष हैं और न ही महिला।
शीतल श्याम ने आगे कहा, 'हम जल्द ही सामाजिक न्याय मंत्री को शिकायत दर्ज करने जा रहे हैं। ट्रांस-पर्सन प्रोटेक्शन एक्ट के समान, हमारे पास एक धारा है जो सोशल मीडिया पर ट्रांस-पर्सन के साथ भेदभाव करने वाले लोगों के लिए दो साल की कैद का प्रावधान करती है। हम पुलिस शिकायत दर्ज करने के बारे में भी सोच रहे हैं।'