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हिंदी दिवस: अमिताभ बच्चन ने अपनी पोस्ट में कही ये बात, सोशल मीडिया पर हो रही जमकर तारीफ

Tue, 14 Sep 2021 08:03 PM IST
ललित फुलारा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार


बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन का हिंदी से लगाव सभी जानते हैं। अक्सर वक्त-वक्त पर वो इसे साबित भी करते रहते हैं। वैसे भी उनके पिता हिंदी के जाने-माने लेखक और कवि रहे हैं। इस हिंदी दिवस के मौके पर अमिताभ ने अपने सोशल मीडिया पर ऐसा कुछ शेयर किया, जिसके कारण फैंस ने उनकी जमकर तारीफ की।
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अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन का हिंदी से लगाव सभी जानते हैं। अक्सर वक्त-वक्त पर वो इसे साबित भी करते रहते हैं। वैसे भी उनके पिता हिंदी के जाने-माने लेखक और कवि रहे हैं। इस हिंदी दिवस के मौके पर अमिताभ ने अपने सोशल मीडिया पर ऐसा कुछ शेयर किया, जिसके कारण फैंस ने उनकी जमकर तारीफ की। अमिताभ ने हिंदी भाषा के प्रति अपने लगाव और प्यार को बड़े खूबसूरत अंदाज में बयां किया।

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अमिताभ ने अपने दोस्त के भेजे एक लेख को इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया। जिसके जरिए उन्होंने हिंदी की महिमा और खूबसूरती बयां की। उनके पोस्ट कैप्शन में लिखा था, हिंदी दिवस की अनेक शुभकामनाएं,  हमारे एक प्रिय मित्र ने ये एक निबंध, जिसे उनके एक मित्र ने उन्हें भेजा था, मुझे भेजा और मुझे लगा कि ये बहुत ही अद्भुत उल्लेख, आप को भेज दूं।

अमिताभ ने शेयर किया ये खूबसूरत निबंध
अमिताभ ने जो निबंध शेयर किया, वह इस तरह है।  ‘मेरे पिता हिंदी ग्रंथ अकादमी में काम करते थे और हिंदी में कविताएं कहानियां लिखते थे। हमारे घर पर हिंदी में जीवन जिया जाता था, मूंग की हींग वाली दाल के साथ करारी रोटी खाते हुए पापा हिंदी में कहते थे, छाया कमाल की दाल बनायी है प्याज देना। मां हिंदी में प्याज काट दिया करती थीं। छोटी सी बिलिया में घी में तैरती मिर्चें भी हिंदी में ही तली जाती थीं। ये वो दिन थे जब मैं दीवार पर हिंदी में चिड़िया बनाकर भागकर बाहर देखती थी कि मेरे दूर होने पर चिड़िया उड़कर अमरूद के पेड़ पर बैठ पाई है कि नहीं?’
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इस निबंध के आखिरी पैरा में बेहद खूबसूरत बात लिखी है। निबंध में लिखा हुआ है, ‘मैंने अपना तमाम जीवन हिंदी में जिया है। बचा हुआ भी हिंदी में ही जियूंगी। दीवार पर जो चिड़िया हिंदी में बनाई थी, एक दिन वो उड़ जाएगी, पर ह से हवा में म से मेरे लिखे हुए प से पन्ने, हमेशा रहेंगे… ब से ब्रम्हांड में… मेरी हिंदी एच से नहीं ह से रहेगी अ से अनंत तक।’ उनकी इस पोस्ट पर फैंस का जमकर प्यार बरसा है। खूब लाइक और कमेंट आये हैं। आपको बता दें कि अमिताभ का नाम भी हिंदी के मूर्धन्य कवि सुमित्रानंदन पंत ने रखा था। उनके पिता हरिवंश बच्चन राय की मधुशाला कविता को आज भी लोग बड़े चाव से गुनगुनाते हैं।
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