83 साल के हो चुके अटल बिहारी अब फिल्मों में आए हैं। उनकी पहली फिल्म 'साला बूढ़ा' है।
उम्र सिर्फ़ एक नंबर है, दिल जवान होना चाहिए। 83 साल के अटल बिहारी कुछ ऐसा ही मानते हैं जो इस उम्र में बन गए हैं एक फ़िल्म में लीड हीरो।
गोवा में चल रहे 44वें अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में ओडिशा से 35 लोगों की टीम आई है, जो अपनी उड़िया फ़िल्म 'साला बूढ़ा' को लेकर यहां आए हैं।
फ़िल्म के मुख्य कलाकार है अटल बिहारी पंडा जो 83 साल की उम्र में इस फ़िल्म से अपना करियर शुरू कर रहे है।
पंडा साहब मानते हैं, "कला तो कला है। इसकी उम्र क्या है। कलाकार के लिए उम्र का कोई सवाल नहीं है।" अटल बिहारी, उड़िया थिएटर का एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने अपने जीवन में कई नाटकों का निर्देशन किया है। साथ ही रंगमंच पर अदाकारी भी की है।
83 नहीं 38 की उम्र
फ़िल्म के बारे में पंडा कहते हैं, "साला बूढ़ा के निर्देशक सब्यसाची महापात्रा ने ऐसे काम कराया है कि जैसे मैं 83 नहीं 38 की उम्र का हूं। शुरुआत में मुझे लगा कि मुझसे शायद यह नहीं होगा। कैमरे से भी मैं परिचित नहीं था। लेकिन निर्देशक ने मुझ पर विश्वास किया और मुझसे अभिनय कराने में सफल रहे।"
परिवार का समर्थन
उनके परिवार में पत्नी के अलावा तीन लड़कियां और तीन लड़के हैं। जब उन्होंने फ़िल्म में एक्टिंग करने के बारे में अपने घर में बताया, तो उन्हें पूरा समर्थन मिला। पंडा कहते हैं, "हम अभिनेता लोग स्वार्थी होते हैं। हम परिवार और बच्चो की नहीं सोचते। हमारे लिए कला ही सबसे पहले है।"
फ़िल्म 'साला बूढ़ा' एक पीरियड फ़िल्म है जो 100 साल पहले ओडिशा में आए एक भयंकर अकाल पर आधारित है, जहां गांव का मुखिया अपना सब कुछ अपने गांव वालों पर न्योछावर कर देता है।
उड़िया फ़िल्मों से 30 साल से जुड़े निर्देशक सब्यसाची महापात्रा बताते हैं कि फ़िल्म की कहानी उनके पिता ने लिखी है और इसके निर्माता हैं उनके छोटे भाई। फ़िल्म के संवाद अटल बिहारी पंडा ने ही लिखे हैं।
आई कितनी लागत
फ़िल्म की शूटिंग में 30 दिन का वक़्त लगा और इसकी लागत आई तक़रीबन 40 लाख रुपए। फ़िल्म का प्रचार करने इसकी टीम हाथ में ढोल नगाड़े लिए, ख़ूबसूरत उड़िया कुरता-पायजामे और गमछा पहने नज़र आई। इस समारोह के बाद 'साला बूढ़ा' देश भर के अन्य फ़िल्म समारोहों में दिखाई जाएगी।