नौकरशाह से अभिनेता बने के. शिवराम का 70 साल की उम्र में निधन हो गया। वह स्वास्थ्य से जुड़ी कई तकलीफों से एक-साथ जूझ रहे थे। उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन वहां उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण उनका निधन हो गया। शिवराम पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने कन्नड़ भाषा में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की।
कई दिन से बीमार थे
उनके परिवार के लोगों ने बताया, कभी उनका रक्तचाप बढ़ रहा था, तो कभी घट रहा था, ऐसे में उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उन्हें 6 दिन पहले ही दिल का दौरा भी पड़ा था। बृहस्पतिवार को दोबारा बीपी बिगड़ा और उन्हें हार्ट अटैक आ गया, जो उनकी मौत का कारण बना। उनके परिवार में पत्नी और बेटी हैं। उनके पार्थिव शरीर को आज रवीन्द्र कलाक्षेत्र में शुभचिंतकों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। अंतिम संस्कार आज शाम को किया जाएगा।
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नौकरशाही पर ध्यान लगाया
1986 में शिवराम ने कन्नड़ में यूपीएससी परीक्षा पास की और ऐसा करने वाले वह पहले व्यक्ति बने। इससे पहले बुनियादी शिक्षा ग्रहण करने के बाद बीए और एमए किया। कर्नाटक प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास कर पुलिस विभाग में पुलिस उपाधीक्षक के रूप में नियुक्त हुए। जब अभिनय में रुचि जागी, तो उन्होंने नागाथिहल्ली चंद्रशेखर निर्देशित 'बा नल्ले मधुचंद्रके' से अभिनय की शुरुआत की। उनकी यह फिल्म तो हिट रही, लेकिन बाद की फिल्में कुछ खास नहीं कर पाईं। फिर उन्होंने एक नौकरशाह के रूप में अपने करियर पर ध्यान लगाया।
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राजनीति का रुख किया
बाद में शिवराम का मन राजनीति में पैर पसारने का किया, तो उन्होंने राजनीति की ओर कदम बढ़ाए। उन्होंने कांग्रेस जाॅइन की। जनता दल सेक्युलर का भी हिस्सा बनें। बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में नियुक्त किया था। उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए।