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Amar Ujala Samvad 2024: इमरजेंसी का नाम बदलकर 'नो वन किल्ड इंदिरा गांधी' रख देना चाहिए, बोलीं कंगना

Mon, 02 Sep 2024 05:17 PM IST
दीक्षा पाठक एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

मुझे तो नहीं लग रहा कि किसी तरह की डिबेट और तर्क वितर्क हो रहे हैं। मुझे लग रहा है कि बंदूके तन रही हैं। सेंसर बोर्ड ने मेरी फिल्म क्लियर कर दी थी। जाहिर सी बात है कि यह फिल्म हमारे संविधान से जुड़ी एक अदभुत घटना को हमारे पास लाता है।
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कंगना रणौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश और हरियाणा के बहुआयामी विकास पर महामंथन अमर उजाला संवाद हरियाणा हो रहा है। कार्यक्रम में शिक्षा, खेल, धर्म, फिल्म व कारोबार जगत की नामचीन हस्तियां रूबरू हो रही हैं। गुरुग्राम स्थित होटल क्राउन प्लाजा में कार्यक्रम चल रहा है। इस समारोह में अभिनेत्री कंगना रणौत ने भी शिरकत की है और अपनी फिल्म आगामी फिल्म 'इमरजेंसी' को लेकर एक खास बातचीत की है। अभिनेत्री ने साथ ही में फिल्म को लेकर विवादों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। 

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 'आपातकाल' लोकतंत्र के लिए काला अध्याय, जब उस पर फिल्म आ रही है तो उस पर सवाल होंगे। आपने इस विषय को चुना फिल्म बनाने के लिए, आज इस पर इतने विचार हैं। नकारात्मक और सकारात्मक दोनों तरह से। अब सेंसर बोर्ड में फिल्म फंस गई है। क्या कहेंगी?
मुझे तो नहीं लग रहा कि किसी तरह की डिबेट और तर्क वितर्क हो रहे हैं। मुझे लग रहा है कि बंदूके तन रही हैं। सेंसर बोर्ड ने मेरी फिल्म क्लियर कर दी थी। जाहिर सी बात है कि यह फिल्म हमारे संविधान से जुड़ी एक अदभुत घटना को हमारे पास लाता है। यह हमारा अधिकार है कि हम इस विषय पर बात करें। लेकिन, तीन-चार दिन पहले इस पर बैन लगा देना। मैंने बहुत सारे ग्रुप्स से कहा है कि किसी को इस पर आपत्ति है तो हम अपना पक्ष रखेंगे। इसका आधार क्या है हम उपलब्ध कराएंगे। अगर आधारहीन लगा तो निकालेंगे। हमारे साथ कोई डिबेट नहीं हुई है। न ही कोई बात की गई है। मुझे लगता है कि इसका नाम अब इमरजेंसी से बदलकर नो वन किल्ड इंदिरा गांधी रखना चाहिए।
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मैं आपमें एक निराशा का भाव देख रही हूं?
कंगना: बिल्कुल मैं एक क्रिएटिव पर्सन मैं निराश हूं। मेरी आवाज दबाई जा रही है। सत्य घटना पर आधारित फिल्म को नहीं दिखाए जाने का मुझ पर दबाव डाला जा रहा है।

क्या आपका फोन किसी ने नहीं उठाया?
अगर आप राजनीति पर कोई बात करेंगे तो फोन उठाएंगे, लेकिन फिल्म पर बात करेंगे तो फोन नहीं उठाएंगे। मैं राजनीति में मात्र दो महीने में आई हैं, पिछले वक्त मैं फिल्मों में एक्टिव थी। मुझे अपनी पार्टी से कोई निराशा नहीं है। लेकिन, बतौर फिल्म मेकर मुझे निराशा है। मैं सेंसर के प्रति बहुत निराश हूं कि उन्होंने मुझसे एक बात नहीं की।
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