इंदौर लोकसभा सीट से बतौर कांग्रेस प्रत्याशी नामांकन दाखिल करने वाले अक्षय कांति बम ने सोमवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत स्थानीय नेता की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा भी ज्वाइन कर ली।
अटकलें थीं कि भारतीय जनता पार्टी इंदौर में भी गुजरात के सूरत जैसा घटनाक्रम दोहराना चाहती थी। मुख्य काम कैलाश विजयवर्गीय ने अपने हाथों में लिया। उन्होंने हाईकमान से हरी झंडी मिलते ही अकेले अपने दम पर अक्षय बम को साधा और भाजपा के पाले में कर लिया। मंत्री विजयवर्गीय ने अन्य काम की जिम्मेदारी इंदौर भाजपा के अध्यक्ष गौरव रणदिवे, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और पूर्व आईडीए अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा को भी सौंपी थी। इन तीनों नेताओं को निर्दलीय उम्मीदवारों को साधने का काम दिया गया था। हालांकि, इन सभी के बावजूद इंदौर में 'सूरत-2' रिपीट नहीं हो पाया।
दरअसल, भाजपा की कोशिश थी कि सूरत की तरह इंदौर के प्रत्याशी शंकर लालवानी भी निर्विरोध चुने जाएं। कांग्रेस का प्रत्याशी भाजपा में आ जाए। साथ ही अन्य सभी निर्दलीय उम्मीदवार भी अपना नामांकन वापस ले लें। लेकिन ये यह काम अधूरा ही रह गया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में सोमवार दोपहर 3 बजे तक निर्दलीय को बैठाने को लेकर माथापच्ची चलती रही, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। 23 में से 9 ही उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए। अब इंदौर लोकसभा सीट पर भाजपा के शंकर लालवानी समेत 14 उम्मीदवार मैदान में हैं।
सूत्रों का कहना है कि निर्दलीय उम्मीदवारों को मनाने में सबसे ज्यादा चूक नगर भाजपा अध्यक्ष गौरव रणदिवे और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से हुई। दोनों नेताओं ने मैदान में सक्रियता नहीं दिखाई। दोनों नेताओं ने निर्दलीय प्रत्याशियों को केवल फोन या मैसेज के जरिए ही संपर्क साधा। न तो उनसे मिलने पहुंचे और न ही मनाने के लिए कोई अन्य रणनीति अपनाई। इसके चलते महज आठ प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस लिया। बाकि 13 उम्मीदवार मैदान में डटे रहे।