चौथा चरण भाजपा के लिए बेहद अहम है। एनडीए के लिए 400 से अधिक सीटों का लक्ष्य हासिल करने के लिए भाजपा को दक्षिण भारत से बहुत उम्मीद हैं। आंध्र में खाता खोलने को बेकरार भाजपा ने इस बार इतना आक्रामक प्रचार किया कि आंध्र प्रदेश के साथ ही तेलंगाना में लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है। भाजपा ने यहां पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू की तेलूगु देशम पार्टी और अभिनेता पवन कल्याण की जन सेना पार्टी से समझौता किया है। इस तरह राज्य में मुख्य रूप से सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, एनडीए व कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के बीच मुकाबला है। इंडिया गठबंधन में वाम दल भी शामिल हैं।
तेलंगाना में पिछले साल विधानसभा चुनाव में सत्ता में आई कांग्रेस का उत्साह जहां बढ़ा हुआ है, वहीं, भाजपा ने भी एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीआरएस नेता के चंद्रशेखर राव के लिए लोकसभा चुनाव विधानसभा में मिली हार का हिसाब चुकता करने का मौका है। उन्होंने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कर्नाटक के बाद दक्षिण भारत में तेलंगाना ही ऐसा राज्य है, जहां भाजपा को कोई सीट मिली है। 2019 में भाजपा ने तेलंगाना में चार सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार पार्टी को ज्यादा की उम्मीद है।
इस चरण की 21 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है। इन सीटों पर उलटफेर की बहुत संभावनाएं हैं। अगर ऐसा होता है तो भाजपा को लाभ मिल सकता है। इन सीटों में अमलापुरम, अनाकापल्ली, अनंतपुरम, बापटला, एलुरु, काकीनाडा, नरसापुरम, राजमुंदरी, विशाखापट्टनम, विजयनगरम, खम्माम, श्रीनगर, मुंगेर, भोंगिर, सिंहभूम, आदिलाबाद, बर्दवान-दुर्गापुर, कालाहांडी और निजामाबाद शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर सीटें दक्षिण भारत में ही हैं।
अर्जुन मुंडा, शत्रुघ्न जैसे चेहरे हैं मैदान में
महुआ मोइत्रा: पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में संसद से निष्कासित तृणमूल कांग्रेस नेता प. बंगाल की कृष्णानगर सीट से मैदान में हैं। उनका मुकाबला कृष्णानगर की राजमाता भाजपा उम्मीदवार अमृता रॉय से है। इंडिया गठबंधन से माकपा के एसएम सादी चुनाव लड़ रहे हैं।
अखिलेश यादव: सपा के अध्यक्ष यूपी की कन्नौज सीट से मैदान में हैं। वह तीन बार कन्नौज का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। यहां से उनकी पत्नी डिंपल यादव और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी सांसद रहे हैं।
गिरिराज सिंह : भाजपा नेता बिहार के बेगूसराय सीट से चुनावी ताल ठोक रहे हैं। यह उनकी पारंपरिक सीट है। 2019 में उन्होंने यहां से भाकपा नेता कन्हैया कुमार को पराजित किया था, जो अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।
अर्जुन मुंडा: केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता झारखंड की खूंटी सीट से मैदान में हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस सीट से मुंडा 2019 में भी विजयी हुए थे। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के कालीचरण मुंडा से है।
शत्रुघ्न सिन्हा: भाजपा से कांग्रेस होते हुए तृणमूल में आए अभिनेता प. बंगाल की आसनसोल सीट से मैदान में हैं। भाजपा ने पवन सिंह के इन्कार के बाद सुरिंदरजीत सिंह अहलुवालिया को प्रत्याशी बनाया। 2019 में बाबुल सुप्रियो भाजपा से जीते, पर बाद में तृणमूल के साथ हो लिए।
असदुद्दीन ओवैसी: एआईएमआईएम अध्यक्ष तेलंगाना की हैदराबाद सीट से मैदान में हैं। 2004 से यहां लगातार चार बार से सांसद हैं। मुस्लिम बहुल यह सीट ओवैसी का गढ़ है। ओवैसी के पहले उनके पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी हैदराबाद से 6 बार सांसद रहे।
माधवी लता: भाजपा नेता तेलंगाना की हैदराबाद सीट से मैदान में हैं। यहां उनका मुकाबला एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से है। चौथे चरण की यह सबसे चर्चित सीट है।
अधीर रंजन चौधरी: प. बंगाल की बेहरामपुर सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। लोकसभा में वर्ष 1999 के बाद से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।
यूसुफ पठान: पूर्व क्रिकेटर को तृणमूल ने प. बंगाल की बेहरामपुर से उतारा है। उनका मुकाबला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन से हैं, जो ममता बनर्जी के कट्टर आलोचक हैं।
वाईएस शर्मिला: आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी की बहन और पूर्व सीएम वाईएस राजशेखर रेड्डी की बेटी कांग्रेस के टिकट पर कडप्पा से भाग्य आजमा रही हैं। 1989 से ही यह सीट रेड्डी परिवार का गढ़ रहा है। यहां उनका मुकाबला चचेरे भाई वाईएस अविनाश रेड्डी से है, जो मौजूदा सांसद हैं। उन्हें जगन मोहन का समर्थन है।
जी किशन रेड्डी: भाजपा नेता सिकंदराबाद से मैदान में हैं। इस सीट से बीआरएस ने टी पद्मा राव गौड़, जबकि कांग्रेस ने दानम नागेंद्र को उम्मीदवार बनाया है।
कहां-कितनी सीटों पर मतदान
96 में से कितनी सीटें किसके पास
2019 : भाजपा को 43 सीटों पर 40% वोट
11 सीटें ऐसी जहां जीत का अंतर 1% से कम रहा