पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए खाना पकाने की पेशकश की है। अब इस मुद्दे पर भी राजनीति गरमा उठी है। एक तरफ भाजपा ने इसे ममता बनर्जी का राजनीतिक एजेंडा करार दिया है, तो दूसरी तरफ सीपीआई (एम) ने इसे टीएमसी और भाजपा के बीच संभावित समझौता कहा है।
पीएम मोदी को मछली चावल खिलाना चाहती हैं ममता- भाजपा
भाजपा नेता तथागत रॉय का कहना है कि ममता बनर्जी अपने हाथ की बनी मछली और चावल पीएम मोदी को खिलाना चाहती हैं। उधर भाजपा नेता शांकुदेब पांडा ने दावा किया कि ममता बनर्जी जान-बूझकर पीएम मोदी को भोजन खिलाना चाहती हैं, जबकि उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री विशुद्ध रूप से शाकाहारी हैं।
टीएमसी-भाजपा के बीच संभावित समझौता- सीपीआई(एम)
सीपीआई(एम) नेता विकास भट्टाचार्य ने संदेह जताया है कि यह भाजपा और टीएमसी के बीच संभावित समझौता हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि दोनों ही पार्टियां राजनीति को धर्म से जोड़ रही हैं और इस वजह से देश आज ऐसी स्थिति का सामना कर रहा है।
टीएमसी सासंद डोला सेन ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
उधर टीएमसी सांसद डोला सेना ने ममता बनर्जी के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पीएम मोदी को अपनी पसंद का भोजन करने का अधिकार है, उसी तरह से लोगों को भी अपनी पसंद का खाना खाने का अधिकार है।
कहां से शुरू हुआ था विवाद?
बता दें कि प्रधानमंत्री ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि तेजस्वी ने पिछले महीने उस दौरान मछली खाई थी, जब कुछ हिंदू मांसाहारी भोजन से परहेज करते हैं। इसके बाद सोमवार को ममता बनर्जी ने कहा था कि वह पीएम मोदी के लिए कुछ खाना बनाना चाहती हैं। टीएमसी नेता ने संदेह भी जताया कि प्रधानमंत्री वह खाना खाएंगे या नहीं।
ममता बनर्जी ने क्या कहा था?
एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि भाजपा अब लोगों के भोजन करने के तरीकों पर भी हस्तक्षेप कर रही है। टीएमसी प्रमुख ने कहा ‘मैं बचपन से खाना बना रहू हूं और लोग मेरे द्वारा बनाए गए भोजन को पसंद करते हैं। लेकिन क्या मोदी जी मेरे बनाए भोजन को स्वीकार करेंगे? क्या वह मुझ पर भरोसा करेंगे? पीएम मोदी को जो भी भोजन पसंद है, मैं वह बनाऊंगी।’ ममता बनर्जी ने आगे कहा था कि देशभर में लोगों अलग अलग तरह का खाना पसंद करते हैं। भाजपा को किसी के भोजन से क्यों परेशानी हो रही है? टीएमसी प्रमुख के अनुसार भाजपा नेताओं को देश की विविधता और समावेशिता के बारे में कम ज्ञान है।