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Rajkot: रूपाला को माफी देने के मूड में नहीं क्षत्रिय, गांवों में नो एंट्री, भाजपा का 'मोदी' और 'जाति' का दांव

सार

भाजपा ने पार्टी की एक खास इकाई को यह जिम्मेदारी दी है कि वह लोगों के बीच जाकर ये मैसेज दें कि क्षत्रिय समाज की नाराजगी रूपाला से हो सकती है, मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं। इसके साथ ही पार्टी ने क्षत्रिय समुदाय के विरोध के बीच अन्य प्रमुख 'जातियों' को साधना शुरू कर दिया है।
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परषोत्तम रूपाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुजरात की राजकोट लोकसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच जोरदार मुकाबला है। क्षत्रिय समाज का विरोध शुरू होने के बाद, दोनों ही दल, अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों में भाजपा के लिए राह थोड़ी मुश्किल बनती जा रही है। राजकोट के क्षत्रिय बाहुल्य कई गांवों में भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं की एंट्री बैन है। क्षत्रिय समाज, केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रत्याशी परषोत्तम रूपाला को माफी देने के मूड में नहीं हैं।
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कांग्रेस को मिलेगा फायदा
भाजपा कहती है कि रूपाला ने माफी मांग ली है, तो क्षत्रिय समाज कहता है, दिल से माफी नहीं मांगी है। रूपाला द्वारा रोटी- बेटी को लेकर दिए गए बयान पर क्षत्रिय समाज का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि क्षत्रिय समाज का वोट अब उनके प्रत्याशी परेश धनानी को मिल जाएगा। इतना ही नहीं, पार्टी को यह भरोसा भी है कि इंडिया गठबंधन में सहयोगी 'आम आदमी पार्टी' का वोट बैंक, पूरा नहीं तो कम से कम 70 फीसदी मत तो कांग्रेस प्रत्याशी में खाते में आ सकते हैं।


भाजपा, पीएम मोदी और जातीय समीकरण पर निर्भर
इन सबके बीच भाजपा ने अब रूपाला को जीत तक पहुंचाने के लिए 'मोदी और जाति' का फॉर्मूला अख्तियार किया है। भाजपा कार्यकर्ता, यह बात स्वीकार करते हैं कि उन्हें राजकोट सीट पर मार्जिन वाली जीत नहीं चाहिए। बस, रूपाला जीत जाएं। पार्टी की एक खास इकाई को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह लोगों के बीच जाकर ये मैसेज दें कि क्षत्रिय समाज की नाराजगी रूपाला से हो सकती है, मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं। इसके साथ ही पार्टी ने क्षत्रिय समुदाय के विरोध के बीच अन्य प्रमुख 'जातियों' को साधना शुरू कर दिया है।
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दोनों ही दलों के नेताओं से हुई बातचीत के आधार पर यह पता चला है कि अब इस चुनाव में 'मोदी' और 'जाति' का मुद्दा अहम हो चला है। राजकोट लोकसभा क्षेत्र में क्षत्रिय समुदाय की आबादी करीब 1.70 लाख है। कांग्रेस प्रत्याशी परेश धनानी लेउवा पटेल हैं। इस समुदाय की आबादी लगभग साढ़े तीन लाख बताई जा रही है। भाजपा प्रत्याशी परषोत्तम रूपाला, कड़वा पटेल हैं। इस समुदाय की आबादी भी करीब दो लाख बताई जा रही है। इनके अलावा 15 फीसदी कोली समुदाय, 9 फीसदी मुस्लिम, पांच से सात फीसदी क्षत्रिय, साढ़े सात फीसदी दलित, 4 फीसदी ब्राह्मण, 4 फीसदी भरवाड-रबारी और करीब 27 फीसदी अन्य जातियां बताई जाती हैं।

इस वजह से परेशान नहीं है भाजपा
भाजपा कार्यकर्ता, नट्टू भाई व्यास यह बात स्वीकार करते हैं कि गलती तो हो गई है। क्षत्रिय समाज ने सोचा था कि विवाद के बाद परषोतम रूपाला को पार्टी से निकाल दिया जाएगा। इस मामले में भाजपा टस से मस नहीं हुई है। उन्होंने सोचा था कि हल्ला करेंगे, तो रूपाला को बाहर कर देंगे। अरे निकाला किसे जाता है, जो आजकल में आता है। गुजरात में पार्टी को खड़ा करने में रूपाला का योगदान है। व्यास की यह बात, इतना इशारा करने के लिए काफी है कि भाजपा अब, क्षत्रिय समुदाय की नाराजगी की ज्यादा परवाह नहीं कर रही। वह दूसरी जातियों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है। क्षत्रिय समाज को लेकर भाजपा, इसलिए भी अधिक चिंतित नहीं है, क्योंकि गुजरात में क्षत्रियों की कुल आबादी जो करीब 15 फीसदी के आसपास बताई जाती है, उसका एक बड़ा हिस्सा 'ओबीसी' समुदाय में आता है। गुजरात में 4-5 फीसदी ठाकुर ही सामान्य वर्ग में आते हैं। ऐसे में भाजपा ने दूसरे समुदायों को साधना शुरू कर दिया है।

परेश धनानी, जो लेउवा पाटीदार हैं, उनकी लोगों में अच्छी साख है। खास बात है कि राजकोट से चुनाव लड़ रहे दोनों दिग्गज, अमरेली से आते हैं। परेश धनानी, तीन बार विधायक रह चुके हैं। सबसे पहले धनानी ने 2002 में अमरेली विधानसभा सीट से परषोत्तम रूपाला को हराया था। अब, दो दशक के बाद ये दोनों नेता, राजकोट में एक दूसरे के सामने हैं। गुजरात भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटिल को इस मामले को हल करने की जिम्मेदारी दी गई थी। पिछले दिनों पाटिल ने कहा था, क्षत्रिय समुदाय का विरोध परषोत्तम रूपाला के लिए है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए नहीं है। क्षत्रिय समाज, हमेशा क्षमा करने के लिए जाना गया है। ऐसे में इस समुदाय को बड़ा दिल दिखाना चाहिए। क्षत्रिय समाज संकल्प समिति के प्रवक्ता करण सिंह के मुताबिक, पुरुषोत्तम रूपाला को क्षत्रिय समाज कभी माफ नहीं करेगा। उनका माफी मांगने का तरीका सही नहीं है। उनके शब्दों पर गौर किया जाए। वे शब्द तहे दिल से माफी मांगने वाले नहीं हैं। किसी भी एंगल से यह अहसास नहीं होता है कि उन्होंने तहे दिल से माफी मांगी है। उनकी माफी में अहंकार साफ झलक रहा था।

कांग्रेस को बंधी जीत की उम्मीद
अमरेली जिला यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष संदीप धनानी कहते हैं, चुनाव अच्छा जा रहा है। विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। महंगाई और बेरोजगारी मुद्दा है। भाजपा उम्मीदवार परषोत्तम रूपाला के 'रोटी और बेटी' के बयान को लेकर लोगों में आक्रोश है। अब यह आक्रोश वोटों में तब्दील होता है या नहीं, देखने वाली बात है। इंडिया गठबंधन में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी, मिलकर लड़ रहे हैं। इसका फायदा होगा। परषोत्तम रूपाला बाबत संदीप ने कहा, इस मामले में लोगों में भारी गुस्सा है। इसके चलते प्रधानमंत्री मोदी को यहां 22 अप्रैल अपनी रैली रद्द करनी पड़ी। संदीप ने दावा किया है कि गुजरात में कांग्रेस पार्टी 10 से 12 सीटें जीतने जा रही है।

कांग्रेस पार्टी के ही वरिष्ठ पदाधिकारी कनु भाई ने बताया, रूपाला की माफी का कोई असर नहीं है। लोग, ज्यादा आक्रोशित हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी का वोट बैंक, कांग्रेस में कितना शिफ्ट होगा, इस सवाल के जवाब में कनु ने कहा, सत्तर-अस्सी फीसदी वोट शिफ्ट हो जाएगा। कांग्रेस के राजकोट ब्लॉक अध्यक्ष, धर्मेश कहते हैं, यूथ 'इंडिया गठबंधन' के बारे में सोच रहा है। युवा सरकार से पूछ रहे हैं कि हमारा रोजगार कहां है? भाजपा, भ्रम फैला रही है। भाजपा के मुद्दे केवल किताबों में होते हैं। जन सुविधाओं की भारी कमी है। चुनाव में हिंदू मुस्लिम के विषय पर कनु भाई ने कहा, हर चुनाव में इस मुद्दे को उठाया जाता है। लोगों को चुनाव में हिंदू-मुस्लिम में बांट दिया जाता है।

धर्मेश बोले, यहां पर युवाओं के बीच आरक्षण का मुद्दा है, रोजगार का मुद्दा है। यहां पर राम मंदिर का निर्माण या जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति, ऐसा कोई मुद्दा नहीं चलेगा। खुद भाजपा कार्यकर्ता नहीं बता पाएगा कि 370 क्या है। मनु भाई ने कहा, ये बात सही है कि यह सरकार संविधान बिगाड़ सकती है। आम आदमी पार्टी ने गुजरात में कांग्रेस का ही वोट काटा था। अब वह पार्टी, कांग्रेस के साथ है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 'आप' से धोखा खाना पड़ा था। भाजपा उम्मीदवार को लेकर गांव में रूपाला के लिए नो एंट्री है।  

भाजपा को है ये उम्मीद
दूसरी तरफ भाजपा नेता कहते हैं, हमारे लिए यह चुनाव मुश्किल नहीं है। नट्टू भाई व्यास यह बात स्वीकार करते हैं कि गलती हो गई है। राजकोट में हमें जीत का बड़ा मार्जिन नहीं चाहिए, रूपाला को कोई हरा नहीं सकता। अगर कम मत मिलते हैं तो कोई बात नहीं। लीड ही कम हो सकती है, मगर हार नहीं हो सकती। बतौर व्यास, रूपाला से गलती हुई है। रोटी बेटी की बात कही गई। कोई गाली नहीं दी है। इसके बाद रूपाला ने तीन-चार बार माफी मांगी है। राजकोट में रूपाला ने कहा, मेरे कारण मोदी को क्यों गालियां देते हो। वह तो विश्व का नेता है। कांग्रेस पार्टी कह रही है कि रूपाला की माफी का कोई मतलब नहीं है। ये तो वही बात हुई कि कोई 'लाफा' (थप्पड़) मार दे और फिर माफी मांग ले, इस सवाल के जवाब में व्यास ने कहा, महात्मा गांधी ने कहा था कि कोई एक गाल पर थप्पड़ मारता है, तो दूसरा गाल आगे कर दो। वो सतयुग था, आज कलयुग है। जो रास्ता बनता है, यानी माफी मांगने का, वो उन्होंने कर दिया है।

चना भाई रामाणी कहते हैं, रूपाला ने माफी मांगी है। इसके बाद क्षत्रिय समाज के कुछ लोगों ने कहा, उन्हें माफ कर देना चाहिए। कुछ गांव में ऐसी स्थिति है कि वहां पर भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। जो भी हो, रूपाला जीतेगा। रूपाला के मामले में दूसरी जातियां, क्षत्रिय समाज के साथ लामबंद हो रही हैं, इस बाबत व्यास ने कहा। यह सच है। नाराजगी, क्षत्रिय समाज की है। उसमें से आधे लोग तो रूपाला के साथ हैं। दूसरे समाज के लोग रूपाला से नाराज हो सकते हैं, लेकिन वे 'मोदी' से नाराज नहीं हैं। आम आदमी पार्टी के वोट किसे मिलेंगे, इस बाबत चना भाई रामाणी ने कहा, 'आप' का साठ-सत्तर फीसदी वोट, भाजपा को मिलेगा। व्यास ने यह बात स्वीकार की है कि भले ही महंगाई है, लेकिन कुछ अच्छे के लिए थोड़ा बहुत झेलना पड़ता है। राहुल गांधी अपनी जनसभाओं में 'जॉब' का मुद्दा उठाते हैं, इस बाबत रामाणी बोले, सभी को समय पर नौकरी मिल जाती है। हमारे गुजरात में तो नौकरी के लिए मना करते हैं। यहां पर तो व्यापार-धंधा करते हैं। कांग्रेस का तो काम है मुद्दा उठाना।

राजकोट में अब भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव में पूरी ताकत लगा दी है। राज्य में दिवंगत कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी ने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिमों को लेकर एक समीकरण तैयार किया था। इस समीकरण के जरिए पाटीदारों को सत्ता से दूर किया जा सकता था। इसका असर बड़े स्तर पर हुआ। जब पाटीदार सत्ता से बाहर हुए, तो उनकी क्षत्रिय समुदाय के साथ दूरी बढ़ी। हालांकि बाद में इस दूरी को कम करने के प्रयास हुए। भाजपा ने अपनी हिंदू लहर के जरिए दोनों समुदायों को साथ लाने की कोशिश की। इस बात के लिए भाजपा पूरी कोशिश करती रही कि क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम, यह समीकरण दोबारा से न बन पाए। अब भाजपा ने रूपाला का टिकट काटने बाबत दो टूक कह दिया, रूपाला वापस नहीं होंगे। वजह भी है, रूपाला के खिलाफ कार्रवाई से पटेल समुदाय नाराज हो सकता था। गुजरात में 14 से 16 फीसदी पाटीदार मतदाता हैं। इनकी नाराजगी, भाजपा को भारी पड़ सकती है। ऐसे में पार्टी ने क्षत्रिय समुदाय, जिनका वोट प्रतिशत पांच-छह फीसदी हैं, उसे छोड़ने का जोखिम लेना बेहतर समझा। हालांकि अब भाजपा के कई बड़े नेता, क्षत्रिय समुदाय के संपर्क में हैं, लेकिन बात नहीं बन रही। पिछले दिनों अमित शाह ने भी कह दिया कि रूपाला ने माफी मांग ली है, अब विवाद शांत हो जाना चाहिए। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने क्षत्रिय समुदाय के साथ अन्य जातियों को अपने पक्ष में करने के लिए गोलबंदी की है। पार्टी को भरोसा है कि राजकोट सीट पर रूपाला को शिकस्त दी जा सकती है।
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