आंध्र प्रदेश के चुनावी अखाड़े में कडप्पा और विजयवाड़ा पर सबकी नजर है...एक जगह भाई-बहन की जंग है...तो दूसरी ओर सगे भाइयों के बीच मुकाबला। मगर, असली अखाड़ा कडप्पा ही है...यहां सीएम जगनमोहन रेड्डी और उनकी बहन वाईएस शर्मिला के बीच विरासत की लड़ाई है, हालांकि दोनों अलग-अलग सदन के लिए मैदान में हैं। शर्मिला कांग्रेस से सांसदी की लड़ाई लड़ रही हैं, तो जगन पुलिवेंदला से विधायकी का चुनाव लड़ रहे हैं। शर्मिला का मुकाबला चचेरे भाई अविनाश रेड्डी से है, जो वाईएसआर से मौजूदा सांसद हैं और उन्हें जगन मोहन का पूरा समर्थन है। दूसरी लड़ाई विजयवाड़ा की है, जहां वाईएसआरसीपी के नानी और टीडीपी के चिन्नी आमने-सामने हैं। आंध्र के इन्हीं मुकाबलों पर बविंद्र वशिष्ठ की रिपोर्ट...
ग्राउंड रिपोर्ट कडप्पा: वाईएसआर की विरासत के लिए भाई-बहन में सियासी संग्राम
कडप्पा...दक्षिण आंध्र के इस शहर का नाम तेलुगु शब्द गडप्पा से आया है। गडप्पा यानी दहलीज। तिरुमला पर्वत की इस दहलीज पर कदम रखते ही सियासत के नए रंग दिखते हैं। यहां पर दक्षिण भारत के दिग्गज नेता रहे वाईएस राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) की विरासत के लिए भाई-बहन में ही सियासी संग्राम है। वाईएसआर के बेटे व सीएम जगन मोहन रेड्डी को उनकी बहन वाईएस शर्मिला सीधी चुनौती दे रही हैं। कडप्पा संसदीय सीट पर चचेरे भाई वाईएस अविनाश रेड्डी के खिलाफ चुनावी ताल ठोक रहीं शर्मिला खुद को वाईएसआर के असली वारिस के रूप में पेश कर रही हैं। लड़ाई व्यक्तिगत और सियासी जुबां कड़वी हो गई है। वारिसों की इस जंग ने मसालेदार व्यंजनों के लिए मशहूर इस क्षेत्र के सियासी जायके को मिर्ची डाल और तीखा कर दिया है।
रायल सीमा इलाके में कडप्पा युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) का गृहक्षेत्र है। आंध्र में कांग्रेस ने शर्मिला को पार्टी की बागडोर सौंपने के बाद इस संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा है। यहां दो बार के सांसद अविनाश रेड्डी शर्मिला-जगन के दूसरे चाचा व पूर्व सांसद वाईएस विवेकानंद रेड्डी की हत्या केस में आरोपी हैं। उधर, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने सी भूपेश रेड्डी को टिकट थमाया है। एक दशक से यहां वाईएसआरसीपी और टीडीपी में सीधी टक्कर रही है, लेकिन इस बार शर्मिला ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
कडप्पा में इलेक्ट्रॉनिक्स के कारोबारी मो. उमर कहते हैं, राजशेखर होते तो आंध्र का विभाजन नहीं होता। विवेकानंद को लेकर अविनाश पर जो आरोप हैं, वो उनके घर का मामला है। सार्वजनिक जीवन में उनकी कॉलर सफेद है। चंद्रबाबू अच्छे प्रशासक हैं, पर जगन के प्रति सहानुभूति बन रही है। एनजीओ चलाने वाले चंद्र किशन का कहना है कि यह विरासत की लड़ाई है। प्रॉपर्टी-पैसे के लिए जंग है। शर्मिला के सवाल जायज हैं, लेकिन तेलंगाना से आईं कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष की बातों पर जनता कितना भरोसा करती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
वाईएसआर परिवार का कब्जा
कडप्पा से वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन दो बार सांसद रह चुके हैं। जगन के पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी कांग्रेस के टिकट पर चार बार सांसद रहे। कांग्रेस के ही टिकट पर जगन के चाचा वाईएस विवेकानंद रेड्डी दो बार जीते। जगन भी पहली बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीते थे। दूसरी बार वे अपनी पार्टी वाईएसआर से जीते। मौजूदा सांसद अविनाश लगातार दो बार जीत चुके हैं। जगन जिस हलके (पुलिवेंदला) से चुनाव लड़ रहे हैं, वह भी कडप्पा संसदीय क्षेत्र में आता है।
मैं वाईएसआर की बेटी...जगन ने चाचा के हत्या के आरोपी को उतारा : शर्मिला
राज अन्ना बिड्डा...। यानी राज अन्ना की बेटी। वाईएसआर और विवेकानंद रेड्डी के साथ शर्मिला के ये पोस्टर कडप्पा के हर चौराहे पर हैं। गाड़ी पर लगी बड़ी स्क्रीन पर शर्मिला का संदेश दिखाया-सुनाया जा रहा है। वह कह रही हैं, मैं वाईएस राजशेखर की बेटी हूं। चाचा विवेकानंद रेड्डी की आत्मा की शांति के लिए लड़ रही हूं। वाईएसआरसीपी ने जिसे चुनाव में उतारा है, वो उनकी हत्या में आरोपी है।
उत्तराधिकारी का फैसला जनता करेगी, विरोधियों से जा मिलीं हैं बहनें : जगन
सीएम जगन मोहन जनसभाओं में कह रहे हैं, वाईएसआर के उत्तराधिकारी का फैसला जनता करेगी। दुख है कि दो बहनें शर्मिला व सुनीता (विवेकानंद की बेटी) ने उन लोगों से हाथ मिला लिया है, जो जनता के जहन से वाईएसआर का नाम मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। कडप्पा के लोग जानते हैं कि विवेकानंद की हत्या किसने की। जिस कांग्रेस ने पहले आंध्र का विभाजन किया वो अब मेरे परिवार को तोड़ना चाह रही है।
चाचा को किसने मारा...जगन नहीं दे रहे बहन को हक : चंद्रबाबू नायडू
कडप्पा के मशहूर सेवन रोड सर्किल पर टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू जनसभा को संबोधित करते हुए सीधा सवाल करते हैं.....चाचा को किसने मारा? सगी बहन को हक नहीं देने वाले ऐसे सीएम की जरूरत है। वाईएसआर मेरे मित्र रहे हैं, लेकिन पिता और बेटे में बहुत फर्क है। वाईएसआर ने विकास की राजनीति की और बेटे ने राज्य को बर्बाद कर दिया। परिवार की लड़ाई को आधार बना चंद्रबाबू सीएम जगन पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं।
साड़ी के रंग पर भी सियासत
वाईएस शर्मिला पिछले दिनों बेटे की शादी के लिए चंद्रबाबू नायडू के घर पीली साड़ी पहन कर गई थीं। चंद्रबाबू की पार्टी टीडीपी के झंडे का रंग भी पीला है। इस पर जगन ने कहा था, वह उनकी स्क्रिप्ट पढ़ रही हैं। उनके अत्याचारों-षड्यंत्रों में अब उनकी हिस्सेदारी है। इस पर शर्मिला ने जगन को असभ्य करार देते हुए कहा था कि सीएम का महिला, खासकर छोटी बहन के कपड़ों पर टिप्पणी करना अपमानजनक है। यह सभी महिलाओं का अपमान है।
पिछले दो चुनावों का हाल
2019
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| अविनाश रेड्डी |
वाईएसआरसीपी |
63.41 |
| आदिनारायण रेड्डी |
टीडीपी |
32.60 |
2014
| उम्मीदवार |
दल |
मत% |
| अविनाश रेड्डी |
वाईएसआरसीपी |
55.95 |
| आर श्रीनिवास रेड्डी |
टीडीपी |
40.10 |