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सिकंदराबाद ग्राउंड रिपोर्ट: बीआरएस विधायकों में छिड़ी जंग, केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी की राहों में बिछे फूल

नवीन चंद्र पटेल Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 13 May 2024 07:15 AM IST

सार

तेलंगाना की 17 सीटों में सबसे ज्यादा (45) प्रत्याशी सिकंदराबाद सीट से ही उतरे हैं। यहां केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी से बीआरएस के मौजूदा विधायक का मुकाबला है। वहीं, रेड्डी की राह में कांटे बिछाने का जिम्मा कांग्रेस और बीआरएस ने जिन दो अनुभवी विधायकों को सौंपा है, वह एक-दूसरे के ही शूल चुभा रहे हैं।
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केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और बीआरएस विधायक टी पद्मराव गौड़ - फोटो : ANI/X- @TPadmaRao

हैदराबाद निजामों की राजधानी था। ईस्ट इंडिया कंपनी से निजाम की हार के बाद सिकंदराबाद की स्थापना एक ब्रिटिश छावनी के रूप में की गई थी। यह ब्रिटिश छावनी हुसैन सागर झील के उत्तर-पूर्व में उलवुल गांव में बनाई गई थी। 1803 में हैदराबाद के तीसरे निजाम सिकंदर जाह ने उलवुल का नाम बदलकर अपने नाम पर सिकंदराबाद कर दिया। सिकंदराबाद शहर का गठन 1806 में हुआ था। यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री रहे सर विंस्टन चर्चिल भी ब्रिटिश सेना में बतौर जूनियर अधिकारी सिकंदराबाद में तैनात रहे थे। मलेरिया की दवा क्लोरोक्वीन खोजने वाले सर रोनाल्ड रॉस ने मलेरिया के कारणों पर प्रारंभिक शोध सिकंदराबाद में ही किया था। मिनिस्टर रोड स्थित यह इमारत सर रोनाल्ड रॉस इंस्टीट्यूट कहलाती है। 

सर्वाधिक चार बार जीते बंडारू  


1957 से अब तक हुए 18 चुनावों में 12 बार कांग्रेस ही जीती है, जबकि चार बार भाजपा। 1991 के राममंदिर आंदोलन की आंधी में आंध्र प्रदेश में भाजपा का खाता बंडारू दत्तात्रेय ने खोला था। वही यहां से सर्वाधिक चार बार सांसद रहे। करीब 19 लाख मतदाताओं वाली सीट पर 78% हिंदू हैं और 12 फीसदी मुस्लिम। मुस्लिम मतों के भरोसे ओवैसी ने भी यहां प्रत्याशी उतारा है। लेकिन, वह वोटकटवा से ज्यादा कुछ नहीं हैं।

मोदी की चर्चा तो दिक्कतों पर भी जोर...जानिए क्या कहते हैं मतदाता 


नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट में प्रो. टी. विजय कुमार कहते हैं कि सिकंदराबाद में आर्थिक विकास का संकट नहीं है। सही बात यह है कि यहां की कमाई से केंद्र सरकार मालामाल होती है। लिहाजा, लोग पहले लोकल काम के लिए स्थानीय पार्टियों को चुनते थे, देश चलाने के लिए राष्ट्रीय पार्टी को। दुनिया में आजकल जिस तरह का माहौल है, उसे देखते हुए रेलवे-रक्षा इकाइयों में कार्यरत केंद्रीय कर्मचारियों और सेना से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोग केंद्र में मजबूत सरकार चाहते हैं। मोदी इसका प्रतीक बनकर उभरे हैं।स्थानीय कारोबारी प्रवीन साहू मोदी के फैन हैं। बोले, पहले हम स्थानीय पार्टियों के नेताओं को सांसद बनाकर दिल्ली भेजते थे, ताकि वहां हमारी आवाज बुलंद हो सके। अब पैटर्न बदल रहा है। लोग सिर्फ मोदी को देख रहे हैं।  टूर-ट्रैवल के व्यवसाय से जुड़े मो. इम्तियाज कहते हैं कि किशन रेड्डी सांप्रदायिक राजनीति नहीं करते। उन्हें मुस्लिम समाज भी वोट देता है।एक अखबार के संपादक यूपी के प्रतापगढ़ निवासी डीपी सिंह हैं, दिक्कत है, उत्तर भारतीयों के लिए ट्रेनों की। सिकंदराबाद दक्षिण भारत का रेलवे हब है, बावजूद इसके पर्याप्त ट्रेनें नहीं हैं।  

पिछले दो लोकसभा चुनावों का हाल 

                                                 लोकसभा चुनाव 2019
उम्मीदवार  दल मत% 
जी. किशन रेड्डी  भाजपा   42.2 
टी. साई किरन यादव बीआरएस  35.2 

 

                               लोकसभा चुनाव 2014
उम्मीदवार  दल मत% 
बंडारू दत्तात्रेय भाजपा   43.6
अंजन कुमार यादव कांग्रेस 18.2 

    

      

       

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