तिरुमला के पहाड़ों पर जय गोविंदा...के जयघोष के बीच इन दिनों सियासी नारे भी गूंज रहे हैं। आंध्र समेत दक्षिण भारत में जमीन तलाश रही भाजपा बालाजी की नगरी में कमल खिलाने के लिए जद्दोजहद कर रही है। हिंदुओं के इस सबसे बड़े तीर्थ स्थल में भगवा फहराकर पूरे दक्षिण को संदेश देने का प्रयास है। लेकिन कांग्रेस के गढ़ रहे तिरुपति संसदीय क्षेत्र में जीत का चौका लगाने को बेताब मुख्यमंत्री जगन की वाईएसआरसीपी को रोकना उसके सामने बड़ी चुनौती है।
देशभर में हिंदुत्व के मुद्दे के साथ चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रही भाजपा आंध्र प्रदेश में टीडीपी और जन सेना का दामन थाम मैदान में उतरी है। हिंदुओं की आस्था के बड़े केंद्र विश्व विख्यात श्री वेंकटेश्वर (बालाजी) मंदिर से जुड़े तिरुपति में भगवा ब्रिगेड की परीक्षा है। साल 1999 में यहां जीत दर्ज कर चुकी भाजपा को इस बार चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण का सहारा है। ऐसे में भगवान वेंकटेश्वर की भूमि में कमल खिला दक्षिण को भगवा संदेश देने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी है।
प्रदेश में सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी ने तिरुपति से अपने मौजूदा सांसद मदिला गुरुमूर्ति को उतारा है। साल 2019 के आम चुनाव और 2021 के संसदीय उपचुनाव में गुरुमूर्ति ने टीडीपी प्रत्याशी को दो लाख से अधिक वोटों से हराया था। तब टीडीपी और भाजपा ने अलग- अलग चुनाव लड़ा था। इस बार दोनों साथ हैं। जनसेना भी गठबंधन में है। भाजपा ने वाईएसआरसीपी से आए वेलागापल्ली वारा प्रसाद राव पर दांव खेला है। कांग्रेस से चिंता मोहन मैदान में हैं, लेकिन टक्कर वाईएसआरसीपी और भाजपा (एनडीए) में ही है। तिरुपति में बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि भाजपा व सहयोगी दल कैसा प्रदर्शन करते हैं। भाजपा की जीत के लिए इन दोनों पार्टियों से बड़ा वोट ट्रांसफर होना जरूरी है। भाजपा कैडर और स्थानीय स्तर पर एनडीए के तीनों सहयोगियों में मतभेद भी चुनौती है। यहां जीत की हैट्रिक लगा चुकी वाईएसआरसीपी का नेटवर्क जमीन पर मजबूत है, लेकिन एंटी इनकंबेंसी फैक्टर और एनडीए की तिकड़ी के सामने उसे कड़ा इम्तिहान देना पड़ रहा है।
जातिगत समीकरण तोड़ने की कोशिश
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित तिरुपति संसदीय क्षेत्र में एससी के अलावा रेड्डी और कम्मा समुदाय के लोग भी खासी तादाद में हैं। एससी व एसटी क्रमशः 25.17 और 9.57 फीसदी है। अल्पसंख्यक करीब नौ प्रतिशत हैं। एनडीए इस बार वाईएसआरसीपी के जातीय समीकरणों को तोड़ने की कोशिश में है। एनडीए इस बात को भी मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है कि जगन सरकार रेड्डी समुदाय के लोगों पर विशेष मेहरबान रही है। कई जातीय संघों ने भी टीडीपी, भाजपा व जेएसपी गठबंधन को समर्थन देने का एलान किया है।
कांग्रेस ने 11 बार दर्ज की जीत, वाईएसआरसीपी की हैट्रिक
तिरुपति सीट पर कांग्रेस ने 11 बार जीत दर्ज की है। 1952, 1962, 1967, 1971, 1977 और 1980 में कांग्रेस जीती। पहली बार टीडीपी ने 1984 में विजय रथ रोका। कांग्रेस ने वापसी करते हुए 1989, 1991, 1996 व 1998 में कब्जा बरकरार रखा। 1999 में पहली बार भाजपा जीती। 2004 और 2009 में कांग्रेस विजयी रही। लेकिन 2014, 2019 व 2021 में वाईएसआरसीपी ने जीत की हैट्रिक लगाई।
वारा के साथ टीडीपी-जनसेना गुरुमूर्ति को जगन का सहारा
तिरुपति संसदीय सीट पर वाईएसआरसीपी और एनडीए में कड़ी टक्कर है। मौजूदा सांसद एवं वाईएसआरसीपी के प्रत्याशी मदिला गुरुमूर्ति को सीएम जगन की स्कीमों का सहारा है तो भाजपा प्रत्याशी वारा प्रसाद राव के साथ चंद्रबाबू की टीडीपी व पवन कल्याण की जनसेना है। संसदीय क्षेत्र के तहत सभी सात हलकों में सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के विधायक गुरुमूर्ति की ताकत हैं तो वारा के साथ पीएम मोदी का भी नाम है। हालांकि, आंध्र में मोदी फैक्टर बहुत प्रभावी नहीं है।
जगन ने सीधे लोगों के खातों में डाले हैं 2.55 लाख करोड़
आंध्र के 85% परिवारों को सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी की डीबीटी स्कीमों का सीधा लाभ मिल रहा है। सालाना हर परिवार को न्यूनतम 10,000 से 12,000 रुपये मिल रहे हैं। जून 2019 से जनवरी 2024 के बीच 29 डीबीटी स्कीमों के लाभार्थियों के खातों में 2.55 लाख करोड़ डाले गए हैं। ये ऋण समेत विभिन्न गैर-डीबीटी स्कीमों पर खर्च किए 1.71 लाख करोड़ के अलावा है। जगन कह रहे हैं कि राज्य में कोई और सत्ता में आया तो ये योजनाएं बंद हो जाएंगी।