भाजपा ने इस बार फायरब्रांड व बड़बोले करीब आधा दर्जन नेताओं से किनारा कर लिया है, जिनके अमर्यादित बयानों से उपजे विवाद के कारण पार्टी को असहज होना पड़ा था। इनमें छह बार के सांसद अनंत कुमार हेगड़े से लेकर प्रज्ञा ठाकुर, नलिन कुमार कतील जैसे नेता शामिल हैं। जिन दूसरे बड़बोले नेताओं को टिकट नहीं मिला, उनमें प्रवेश वर्मा, रमेश विधूड़ी, प्रताप सिम्हा भी हैं। इनकी विवादास्पद टिप्पणियों ने भी पार्टी की परेशानी बढ़ाई थी। हालांकि, तीखी बयानबाजी करने वाले तेजस्वी सूर्या, शोभा करंदलाजे, साक्षी महाराज फिर से मैदान में हैं। सूत्रों के मुताबिक टिकट उन्हीं फायरब्रांड नेताओं का काटा गया है, जिन्होंने नीति, विकास और योजनाओं पर बात रखने की हिदायत की बार-बार अनदेखी की।
पीएम की नाराजगी भारी पड़ी
बड़बोले नेताओं का टिकट काटने का फैसला पीएम नरेंद्र मोदी के स्पष्ट निर्देश के बाद किया गया। प्रज्ञा ठाकुर ने जब नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था, तब पीएम ने कहा था कि वह कभी उन्हें माफ नहीं कर पाएंगे।
रमेश विधूड़ी की संसद में बसपा सांसद दानिश अली पर विवादास्पद टिप्पणी और अनंत कुमार हेगड़े के बार-बार संविधान बदलने संबंधी बयान से पीएम खासे नाराज थे। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रवाद उसका अहम हथियार है, मगर बड़बोले नेताओं के तरीके से नहीं।
हिदायत के बाद भी नहीं ली सीख
हेगड़े ने 2017 में संविधान बदलने संबंधी टिप्पणी की थी। इस पर विपक्ष की आलोचना से पार्टी असहज हुई थी। हिदायत के बावजूद हेगड़े ने दो बार गलती दोहराई। प्रज्ञा सिंह ने मुंबई हमले में शहीदों का अपमान किया। महिलाओं को चाकू रखने की सलाह दी, तो महात्मा गांधी पर लगातार प्रतिकूल टिप्पणी की। प्रताप सिम्हा, नलिन कुमार ने टीपू सुल्तान के मुद्दे पर निचले स्तर की टिप्पणियां कीं। विधूड़ी और प्रवेश वर्मा भी विवादास्पद टिप्पणियां करते रहे। तेजस्वी सूर्या, शोभा करंदलाजे, साक्षी महाराज ने कुछ टिप्पणियां की थीं। लेकिन, चेतावनी के बाद उन्होंने नेतृत्व को दूसरी बार शिकायत का मौका नहीं दिया।