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चर्चित चेहरा: बाड़मेर से मैदान में रविंद्र सिंह भाटी, छात्र जीवन से दबंग राजनीति, इस निर्दलीय के चर्चे हर तरफ

Sun, 07 Apr 2024 06:49 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर

सार

रविंद्र सिंह भाटी जब 2023 विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे तो एक यात्रा निकाली थी। जिसमें वह सुदूर क्षेत्रों में जनता के बीच जाते थे। तब वह वहां भी गए जहां आजादी के 75 साल बाद तक भी कोई नेता नहीं पहुंचा था।
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रविंद्र सिंह भाटी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजनीति में टिकट न मिलने पर बगावत के यूं तो कई किस्से हैं लेकिन देश की दूसरी सबसे बड़ी संसदीय सीट बाड़मेर में एक ऐसा बागी है, जिसका अंदाज अनोखा है। 26 की उम्र में दो बार टिकट नहीं मिलने पर बगावत कर निर्दलीय लड़े और उसके बाद जो हुआ, रिकॉर्ड बन गया। छात्र राजनीति में सक्रिय रहे रविंद्र सिंह भाटी को जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी के छात्र चुनाव में टिकट नहीं दिया, तो भाटी ने निर्दलीय लड़ा। पश्चिम राजस्थान के सबसे बड़े विवि में 57 साल के इतिहास में पहली बार निर्दलीय अध्यक्ष बन परचम फहरा दिया।
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बगावत का सिलसिला थमा नहीं, 2023 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने जब उन्हें बाड़मेर की शिव विधानसभा से टिकट नहीं दिया तो भाटी फिर निर्दलीय मैदान में उतरे और नौ बार के विधायक 84 वर्षीय वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमीन खान को दसवें चुनाव में पटकनी देकर रिकॉर्ड जीत दर्ज की। तीसरी बार फिर रविंद्र भाटी ने बाड़मेर लोकसभा सीट से निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है। इस बार वे भाजपा के केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को चुनौती देंगे।

रविंद्र सिंह भाटी जब 2023 विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे तो एक यात्रा निकाली थी। जिसमें वह सुदूर क्षेत्रों में जनता के बीच जाते थे। तब वह वहां भी गए जहां आजादी के 75 साल बाद तक भी कोई नेता नहीं पहुंचा था। भाटी ने वहां जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं।
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बाड़मेर में त्रिकोणीय मुकाबला
बाड़मेर में साढे़ चार लाख जाट वोटर है और पिछले चुनाव में भाजपा के कैलाश चौधरी को इसी का फायदा मिला था। इस बार कांग्रेस ने आरएलपी से आए उम्मेदा राम को उतारा है। उम्मेदा भी जाट हैं। इससे चौधरी का जाट वोट बंटेगा। उधर, भाटी के निर्दलीय उतरने से राजपूत वोट एकतरफा उनके खाते में जाने की उम्मीद है। ऐसे में भाजपा के वोट में बिखराव होना तय है। भाजपा के वोटरों में क्षत्रिय के बाद मूल ओबीसी हैं। विधानसभा चुनाव में ओबीसी मतदाता ने भाटी को वोट किया था। ऐसे में इस त्रिकोणीय मुकाबले में चौधरी के लिए मुश्किलें कम नहीं होंगी।

नामांकन में जुटा समर्थकों का रेला
भाटी ने जब बाड़मेर से निर्दलीय परचा दाखिल किया तो उनके साथ हजारों का हुजूम मौजूद था। नामांकन के बाद उन्होंने जनसभा भी की, जिसमें समर्थकों का रेला उमड़ा। कहते हैं रेगिस्तान में जब गर्मी बढ़ती है, तो आंधियां चलती हैं। बाड़मेर में सियासी पारा तो भाटी ने बढ़ा दिया है। देखना है कि उनकी आंधी में प्रतिद्वंद्वियों का क्या हाल होता है। भाटी के समर्थकों के वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं।
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