राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC - National Register for Citizens) और नागरिकता कानून (Citizenship Act 2019 - CAA) के बाद अब मोदी सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR - National Population Register) लाने की तैयारी कर रही है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Census Commissioner) विवेक जोशी ने इस बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि असम को छोड़कर देश के अन्य सभी हिस्सों में एनपीआर पर काम शुरू किया जाएगा। वहीं, इस संबंध में आधिकारिक वेबसाइट पर भी जानकारी दी गई है। सरकार ने बताया है कि एनपीआर के लिए काम कब से और किसी तरह शुरू किया जाएगा।
अब सवाल है कि एनपीआर है क्या? इसके आने से जनगणना में क्या बदल जाएगा? सरकार एनपीआर क्यों लाना चाहती है? इन सभी सवालों के जवाब आगे पढ़ें।
आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए अंतिम बार साल 2010 में आंकड़े जुटाए गए थे। जब 2011 के लिए जनगणना (Census 2011) की जा रही थी। इन आंकड़ों को फिर साल 2015 में अपडेट किया गया था। इसके लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण हुए थे। उन आंकड़ों को डिजिटल करने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। अब सरकार ने ये फैसला लिया है कि 2021 जनगणना (Census 2021) के दौरान असम को छोड़कर अन्य सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के लिए इन आंकड़ों को फिर से अपडेट किया जाएगा। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा एक राजपत्रित अधिसूचना पहले ही प्रकाशित की जा चुकी है।