यूपीएससी में आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस और आईईएस जैसे कई पद हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में बने रहने वाले पद आईएएस और आईपीएस के होते हैं। यूपीएससी की परीक्षा में टॉप रैंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों का चयन आईएएस और आईपीएस के पदों पर किया जाता है। हालांकि, कई बार पदों को लेकर उम्मीदवारों द्वारा चुनी गई अपनी प्राथमिकता भी मायने रखती है। आईएएस पद पर चयनित उम्मीदवारों को केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय नियंत्रित करती है। वहीं एक आईपीएस अधिकारी को केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
कैसे होता है चयन?
आईएएस और आईपीएस के पदों पर चयन के लिए उम्मीदवारों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षा को पास करना होता है। इस परीक्षा में उम्मीदवारों को सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा के लिए आवेदन कर के इसमें शामिल होना होता है। यूपीएससी द्वारा इसके लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी किया जाता है। प्राथमिक परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा में शामिल होना पड़ता है और इसमें चयन होने के बाद उन्हें साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाता है। इन प्रक्रियाओं के बाद आयोग के द्वारा मेरिट सूची जारी की जाती है। इसके अनुसार उम्मीदवारों को चयन किया जाता है। मेरिट सूची में केवल मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों को ही गिना जाता है। प्रारंभिक परीक्षा केवल क्वालिफाइंग होती है।
कैसे होता है प्रशिक्षण?
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में सफल होकर आईएएस और आईपीएस दोनों पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में भेजा जाता है। यहां आईएएस, आईपीएस और आईएफएस में चयनित उम्मीदवारों को एक साथ ही 3 महीने तक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रशासनिक कौशल और कामकाज से जुड़ा बातें सिखाई जाती है।
3 महीने के प्रशिक्षण के बाद आईपीएस के पद पर चयनित उम्मीदवारों को पुलिस प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद में स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में भेज दिया जाता है। वहीं आईएएस के पद पर चयनित उम्मीदवारों को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ही आगे का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन्हें प्रशासन, शासन प्रणाली और पुलिस तंत्र, कानून व्यवस्था से जुड़ी बातों की शिक्षा दी जाती है।
प्रशिक्षण के बाद आईएएस और आईपीएस को मिलने वाले बड़े पद या विभाग?
आईएएस पद पर चयनित उम्मीदवार को प्रशिक्षण काल समाप्त होने के बाद डिप्टी कलेक्टर, कलेक्टर, जिला मजिस्ट्रेट और निगमायुक्त जैसे कई पदों पर नियुक्ति मिलती है। आईएस के कार्यकाल में उसे मिलने वाला सबसे ऊंचा पद सचिव का होता है। इस पद को देश में आईएएस को मिलने वाला सबसे ऊंचा पद माना जाता है। वहीं आईपीएस की बात करें तो प्रशिक्षण काल समाप्त होने के बाद उन्हें एसपी और आगे चल कर एसएसपी आदि पदों पर नियुक्ति मिलती है। आईपीएस ऑफिसर अपने कार्यकाल में राज्य का डीजी, सीबीआई, आईबी और रॉ में निदेशक के पदों पर भी नियुक्ति पा सकता है।
आईएएस और आईपीएस के कार्यक्षेत्र?
प्रशिक्षण काल के खत्म होने के बाद एक आईएएस अधिकारी को किसी जिले, निगम या फिर किसी विभाग के अंतर्गत नियुक्ति मिलती है। आईएएस अधिकारी को जिले में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी जाती है। वहीं एक आईपीएस अधिकारी को किसी जिले या क्षेत्र का पुलिस प्रमुख बनाया जाता है। आईपीएस के पास उस संबंधित क्षेत्र में कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी होती है।
आईएएस या आईपीएस, किसके पास होती है ज्यादा शक्ति?
आईएएस और आईपीएस दोनों ही अधिकारियों के पास अपने-अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण शक्तियां होती है। हालांकि, आईएएस के पास आईपीएस की तुलना में कहीं अधिक शक्ति होती है। आईएस जब जिलाधिकारी के रूप में कार्य कर रहा होता है, तब उसके पास अधिकार और शक्ति दोनों ही आईपीएस अधिकारी से कहीं अधिक होती है। एक जिले के लिए केवल एक ही जिलाधिकारी की नियुक्ति की जाती है। वहीं एक जिले में कई आईपीएस अधिकारी हो सकते हैं। जिलाधिकारी के रूप में आईएएस के पास पूरे जिले की जिम्मेदारी होती है। इसका मतलब है कि जिलाधिकारी जिले के सभी विभागों के साथ ही पुलिस विभाग का भी प्रमुख होता है। वह पुलिस को जिले में कानून व्यवस्था से जुड़े आदेश जैसे कर्फ्यू आदि लगाने, लाठीचार्ज करने, गोली चलाने के आदेश देने का भी अधिकार रखता है। इसके अलावा विभागीय तबादलों में भी आईएएस अधिकारी को ज्यादा शक्तियां प्रदान की गई है। आईएएस अधिकारी का वेतन भी एक आईपीएस अधिकारी के मुकाबले में अधिक होता है। इसलिए हम यह मान सकते हैं कि एक आईएएस अधिकारी आईपीएस के मुकाबले कहीं ज्यादा शक्तिशाली होता है।