पत्र में कहा गया है कि पीएम-उषा योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के दृष्टिकोण को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की उच्च शिक्षा प्रणाली में पहुंच, समानता और उत्कृष्टता के उच्च स्तर को प्राप्त किया जा सके और इसके लिए असेवित और अल्पसेवित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए। इसमें कहा गया है कि उन जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जहां सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) कम है, दलितों और आदिवासियों की आबादी अधिक है और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित हैं।
पटनायक ने कहा, इसके अलावा, इस योजना का लक्ष्य नए संस्थान बनाना और मौजूदा संस्थानों में बदलाव लाना भी है। मल्टीपल एंट्री-एग्जिट, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, नेशनल हायर एजुकेशन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ), भारतीय ज्ञान प्रणाली आदि जैसे सुधारों के साथ जोड़कर आपके राज्य द्वारा प्रस्तावों की योजना बनाने और मसौदा तैयार करने की प्रतिबद्धता से दोनों के बीच बेहतर एकीकरण होगा।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत अनुदान सहायता प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव जमा करने की प्रक्रिया एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से शुरू हो चुकी है। ओडिशा के रहने वाले प्रधान ने पटनायक से इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने का अनुरोध किया ताकि राज्य योजना के लाभों से वंचित न हो। राज्य के एक अधिकारी ने कहा कि इस मामले पर ओडिशा सरकार द्वारा चर्चा की जा रही है।