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UGC हुई अब गुजरे जमाने की बात, HECI होगा नया नाम

Wed, 27 Jun 2018 09:54 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
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उच्च शिक्षण संस्थानों को मान्यता समेत नियम बनाने वाली संस्था यूजीसी भंग हो रही है। केंद्र सरकार ने पहली बार यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन को गठित करने वाले यूजीसी एक्ट 1956 को भंग करते हुए उसकी जगह हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (एचईसीआई) एक्ट 2018 का डॉफ्ट तैयार कर पब्लिक नोटिस के माध्यम से सात जुलाई तक सुझाव मांगे हैं। 
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खास बात है कि एचईसी का काम सिर्फ गुणवत्ता, शोध, पढ़ायी समेत नियम बनाने पर फोकस करना होगा। पहली बार नियम न मानने वाले संस्थानों पर नकेल कसने के लिए मान्यता रद, जुर्माना संग सीपीसी के तहत तीन साल कैद का प्रावधान किया गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूजीसी एक्ट 1956 को भंग करने के साथ ही यूजीसी की जगह उसका नाम हायर एजुकेशन कमीशन कर दिया है। 

यानी अब एक सिंगल रेगुलेटरी ही केंद्रीय, निजी, डीम्ड-टू-वी यूनिवर्सिटी, निजी यूनिवर्सिटी के लिए सभी प्रकार के नियम तय करेगी, जोकि अभी तक मंत्रालय करता था। एचईसीआई एक्ट 2018 लागू होने के बाद मंत्रालय की बजाय ऑनलाइन रैगुलेशन डिग्री, नैक रिफार्म, विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को स्वायत्तता देना, ओपन डिस्टेंस लर्निंग रैगुलेशन आदि का सारा कामकाज हायर एचईसी करेगा। जबकि मंत्रालय वित्तीय कामकाज संभालेगा, जिसमें विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को ग्रांट देना, स्कॉलरशिप राशि आदि का भुगतान करना भी शामिल रहेगा, जोकि अभी तक यूजीसी करता था। 
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सुझावों के तहत ड्रॉफ्ट बिल में बदलाव होगा

यूजीसी
देशभर के छात्र, अभिभावक, शिक्षाविद, शिक्षकों व आम जनता से मिले सुझावों के तहत ड्रॉफ्ट बिल में बदलाव होगा। उसके बाद इस बिल को कैबिनेट में रखा जाएगा। कैबिनेट में पास होने के बाद मानसून सत्र में पार्लियामेंट में पास होने के लिए भेज दिया जाएगा।  

पहली बार जुर्माने संग जेल का प्रावधान  
पहली बार उच्च शिक्षण संस्थानों की मनमानी रोकने के लिए एचईसीआई एक्ट 2018 में जुर्माने संग सजा का प्रावधान भी किया गया है। ड्रॉफ्ट में एचईसी द्वारा गठित रेगुलेशन, नियम व सुझावों को यदि कोई संस्थान मानने से इंकार करता है, या नियमों को पूरा नहीं करता है तो उक्त संस्थान की मान्यता रद्द होगी। जिस कोर्स या डिग्री में संस्थान नियम का पालन नहीं करेंगे तो उस कोर्स या डिग्री को पढ़ाने की मंजूरी भी वापस ले ली जाएगी।

एचईसीआई एक्ट 2018 के तहत नियम न मानने वाले संस्थान के मैनेजमेंट से जुड़े शीर्ष अधिकारी व चीफ एग्जीक्यूटिव पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी शामिल है। इसके अलावा नियम न मानने का दोषी पाए जाने पर क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीपीसी) के तहत तीन साल या उससे अधिक की सजा के तहत जेल भेजने का भी प्रावधान किया गया है।  

गुणवत्ता के दस बिंदूओं पर फोकस
एचईसी का मुख्य काम गुणवत्ता, रिसर्च आदि पर फोकस रहेगा, जिसमें उच्च शिक्षा के विभिन्न कोर्स के लिए स्पेसफाई लर्निंग ऑउटकम समेत टीचिंग, रिसर्च, पाठ्यक्रम व अस्समेंट के लिए नियम बनाना शामिल है। हर वर्ष अकेडमिक परफारमेंस का मूल्यांकन, रिसर्च को बढ़ावा, पढ़ायी के आधार पर संस्थानों को मूल्यांकन व मान्यता देना, नियमों के तहत संस्थान मुलभूत सुविधाएं मुहैया करवा रहे हैं या नहीं का आकलन भी करना होगा। इसके अलावा राज्य यदि नियमों का पालन नहीं करते हैं तो फिर केंद्र सरकार के पास मामला भेजा  जाएगा।  

एचईसीआई के महत्वूपर्ण बिंदू :  
- एचईसी में चेयरपर्सन, वाइस  चेयरपर्सन समेत 12 अन्य सदस्य होंगे, जिन्हें केंद्र सरकार चयनित करेगी। इन पदों को भरने के लिए केंद्र सरकार अधिसूचना जारी करेगी। सरकार के पास उक्त अधिकारियों को हटाने का प्रावधान भी होगा।  
- चेयरपर्सन व वाइस चेयरपर्सन अकेडमिक, रिसर्च आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ होने जरूरी होंगे। चेयरपर्सन को कैबिनेट सेक्रेटरी द्वारा गठित सर्च सलेक्शन कमेटी चयन करेगी, जिसके पास नेशनल इम्पार्टन्स इंस्टीट्यूट आदि संस्थानों में कम से कम दस साल प्रोफेसर पद के स्तर का अकेडमिक अनुभव जरूरी है। 
- एचईसी अधिकारी का सेवाकाल खत्म होने से छह महीने पहले पद के लिए विज्ञापन जारी करने के साथ योग्य उम्मीदवार का चयन कर लिया जाएगा।  
- कुलपति,उपकुलपति, प्रिंसिपल, डीन, एचओडी, शिक्षक व गैर शिक्षक कमियों की नियुक्ति के नियम बनाना।  
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