फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

थ्री इडियट्स के 'फुंगसुक वांगड़ू' के सुझाव, जिन्हें सरकार मान ले तो सुधर जाएगी देश की शिक्षा

Tue, 30 Jul 2019 01:10 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
Sonam Wangchuk - फोटो : Social Media
विज्ञापन

थ्री इडियट्स फिल्म के फुंगसुक वांगड़ू को तो आप जानते होंगे। वह किरदार जिसे फिल्म में आमिर खान ने निभाया था। लेकिन असल जीवन में यह किरदार लद्दाख में रहने वाले इंजीनियर व इनोवेटर सोनम वांगचुक से प्रेरित है। वो सोनम वांगचुक जिन्होंने शिक्षा को एक नई परिभाषा दी है। हाल में वांगचुक दिल्ली आए थे, जब उन्होंने यहां के सरकारी स्कूलों में चल रहे हैप्पीनेस क्लास में हिस्सा लिया। यहां 'समानता के लिए शिक्षा और सामाजित उत्तरदायित्व' विषय पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लिया। इस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक ने ऐसे सुझाव दिए, जिन्हें अगर सरकार मान ले तो हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था सुधर जाएगी।

विज्ञापन


हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स के निदेशक वांगचुक ने कहा कि 'मैंने कई देशों की यात्रा की है। अगर अम शिक्षा में समानता की बात करें, तो मैंने अपने देश से ज्यादा बुरी स्थिति कहीं की नहीं देखी। ये वो देश है जहां 5 से 10 फीसदी बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ते हैं जो अमेरिका के स्कूलों से भी बेहतर हैं। वहीं, करीब 90 फीसदी बच्चों के स्कूलों की स्थिति किसी सब-सहारन अफ्रीका से भी बुरी है।'

क्या हैं वो सुझाव, यहां पढ़ें

विज्ञापन

  • सबसे पहले तो वांगचुक ने देश के सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने की बात की। कहा कि इसके बिना देश में शिक्षा की बेहतरी संभव नहीं है।
     
  • वांगचुक ने कहा कि जन प्रतिनिधियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पढ़ें। अगर इन सभी प्रतिनिधियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे, तो उनकी स्थिति पर कहीं ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। अभी स्थिति खराब है क्योंकि जिन लोगों के पास संसदीय स्तर पर आवाज उठाने का अधिकार है, उनके बच्चे उन स्कूलों में पढ़ते ही नहीं।
     
  • वांगचुक ने इसके लिए सरकार से नीति बनाए जाने की भी अपील की। कहा, 'हम हर किसी को ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। लेकिन विधायकों व सांसदों जैसे जन प्रतिनिधियों के लिए एक नीति जरूर बनाई जानी चाहिए। ताकि वे भी उन सेवाओं का लाभ उठाएं जिन्हें वे दूसरों को देने का दावा करते हैं। मैं गारंटी दे सकता हूं कि अगर ऐसा होता है तो पांच सालों में उनके बच्चे कोई खामियाजा नहीं भुगतेंगे, बल्कि बाकियों के बच्चों की बेहतरी हो पाएगी। शिक्षकों का प्रशिक्षण समय पर होगा। किताबें बेहतर होंगी।'
ये भी पढ़ें : क्या आपने देखी दिल्ली के सरकारी स्कूलों की ये तस्वीरें, जिन पर छिड़ा है विवाद
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें