नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकाल, उद्यम की भावना जागृत करें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 शिक्षा को केवल नौकरी दिलाने के साधन के रूप में नहीं देखती है, बल्कि नीति भारतीय लोकाचार में निहित है जो बेहतर नागरिक बनाने पर विचार करती है। उन्होंने कहा कि एक बच्चे को जीवन में एक बड़ा व्यक्ति बनाने में शिक्षक की अहम भूमिका है। इसके लिए शिक्षक को पढ़ाई-लिखाई के साथ बच्चे में से डर, आलस्य, ईर्षा व अविवेक जैसी नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकाल कर उसमें तेज, परोपकार, परिश्रम, उद्यम की भावना जागृत करने का भी प्रयास करना चाहिए।
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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में देरी दुर्भाग्यपूर्ण
शाह ने कहा कि भारतीय परंपरा में ज्ञान और शिक्षा बहुआयामी थे और मोदी जी द्वारा लाई गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 बच्चों के अंदर की प्रतिभा को निखार कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य देने का एक उत्कृष्ट माध्यम बनेगी। महामारी के दौरान शुरू की गई शिक्षा नीति बिल्कुल पूर्व राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन के विचारों के समान है, जिनकी जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। अमित शाह ने शिक्षा के बारे में राधाकृष्णन की गहरी सोच को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का औपचारिक रूप देने में लगने वाले समय को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
नई शिक्षा नीति राधाकृष्णनजी के विचारों का प्रतिबिंब
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णनजी एक दार्शनिक, महान शिक्षक व विद्वान होने के साथ एक अध्यात्मवादी व्यक्तित्व व रचनात्मक प्रतिभा के धनी थे। नई शिक्षा नीति-2020 शिक्षा के प्रति राधाकृष्णनजी के विचारों का प्रतिबिंब है। शाह ने शिक्षक समुदाय से अपने पेशे को बेहतर ढंग से समझने के लिए उन्हें और अधिक पढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह वर्तमान शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे भारत के भविष्य के नागरिक बनाएं।