सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को असम सरकार को 2020 के असम विधानसभा कानून को बरकरार रखने वाले गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसके अनुसार सभी सरकारी मदरसों को सामान्य शैक्षणिक संस्थानों में बदला जाना था। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने 13 लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया।
दरअसल, याचिकाकर्ता ने 04 फरवरी, 2022 को गुवाहाटी हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती दी है, जिसमें असम मदरसा शिक्षा अधिनियम, 1995 (2020 के अधिनियम द्वारा निरस्त) और सभी परिणामी सरकारी आदेशों की वैधता को बरकरार रखा गया है। याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज करते हुए, मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया के नेतृत्व में हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने असम मदरसा शिक्षा अधिनियम, 1995 और शिक्षक और शैक्षणिक संस्थानों का पुनर्गठन अधिनियम 2018 को रद्द करने और असम मदरसा शिक्षा निरस्तीकरण अधिनियम, 2020 को बरकरार रखा था।
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने कहा कि मदरसों को प्रांतीयकरण के माध्यम से पूरी तरह से राज्य द्वारा संचालित सरकारी स्कूल होने के कारण संविधान के अनुच्छेद 28(1) से प्रभावित किया जाता है और इस तरह, धार्मिक शिक्षा प्रदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। वहीं, याचिकाकर्ताओं, जिनमें इमाद उद्दीन बरभुइया शामिल हैं, ने कहा कि हाई कोर्ट ने गलत तरीके से देखा है कि याचिकाकर्ता मदरसों को सरकारी स्कूल होने के कारण धार्मिक शिक्षा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।