उत्तर-दक्षिण के सेतु के नाम से प्रसिद्ध महाकवि सुब्रह्मण्य भारती की जयंती के मौके पर स्कूलों और कॉलेजों में 11 दिसंबर को भारतीय भाषा दिवस मनाया जाएगा। इसका मकसद, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के तहत छात्रों को भारतीय भाषाओं की जानकारी देने, अन्य भारतीय भाषाएं सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है। भारतीय भाषाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलेगी।
इसमें नाटक, भाषाई खेल, संगीत, कला प्रदर्शनी, भाषण, गायन व लेखन प्रतियोगिता और विभिन्न राज्यों के फूड कार्नर भी लगाए जाएंगे। कार्यक्रमों में अभिभावक, भाषा संघ, भाषा क्लब, सांस्कृतिक, कला, साहित्यिक संस्थान भी शामिल होंगे। यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि एनईपी की सिफारिश के तहत एक भारत-श्रेष्ठ भारत में ग्रेड 6-8 में छात्रों को भारत की भाषाओं से रूबरू करवाना है।
छात्रों को भारत की भाषाओं के माध्यम से उन राज्यों के इतिहास, संस्कृति, खान-पान आदि को भी जानने का मौका मिलगा। तमिल साहित्यकार सुब्रह्मण्य भारती को उत्तर और दक्षिण के बीच सेतु माना जाता था। उनके देशभक्ति, राष्ट्रवाद को जगाने वाले ज्वलंत गीत थे। उनकी शिक्षा तमिलनाडु और वाराणसी में हुई थी। इसीलिए उनकी जयंती को भारतीय भाषा उत्सव दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया गया है।
नई तकनीक से भारतीय भाषाओं को सिखाने पर जोर
भारतीय भाषा दिवस के तहत भाषण, गायन, लेखन प्रतियोगिता, नाटक, कला प्रदर्शनी, संगीत, भाषाई खेल का आयोजन किया जाएगा। विभिन्न राज्यों के फूड कार्नर, विभिन्न राज्यों के पहनावे पर आधारित प्रदर्शनी आयोजित कराई जाएगी। भारत की भाषाई विविधता, संपन्नता और भविष्य के भारत, एक भारत-श्रेष्ठ भारत को दर्शाती भारतीय भाषाओं की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
भाषा संघ, भाषा क्लब, संस्थान होंगे शामिल
इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षण संस्थानों और स्कूली छात्रों के अभिभावकों को भी शामिल किया जा सकता है। विभिन्न भाषा संघ, भाषा क्लब, सांस्कृतिक कला, साहित्यिक संस्थान भी इसका हिस्सा बन सकते हैं। भाषाई अनुभव को उत्सव में शामिल करने के लिए पड़ोसी कस्बों, जिलों, संस्थानों को भी आमंत्रित किया जा सकता है।