मानवाधिकार के क्षेत्र में उनके काम ने उन्हें 700 से अधिक परिवारों से जोड़ा। वह सक्रिय रूप से बाल अधिकार, भूमि स्वामित्व अधिकार, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, एलजीबीटी अधिकार, पुन: उत्पादक अधिकार और पर्यावरण और श्रम अधिकार दूसरों के बीच में काम करती रहीं। इसके अलावा, उन्होंने डॉ रीना पटेल को उनकी पुस्तक "हिंदू वीमेन्स प्रॉपर्टी राइट्स इन रूरल इंडिया: लॉ, लेबर एंड कल्चर इन एक्शन" के लिए शोध में सहायता भी की।
इंटरनेशनल लॉ और ट्रेड सेक्टर में की पढ़ाई और ट्रेनिंग
उन्होंने इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ, नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और व्यवसाय कानून में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पूरा किया। इसके बाद, स्वाति ने सेंटर फॉर इंटरनेशनल लॉ एंड डेवलपमेंट में एक रिसर्च फेलो के रूप में प्रो. नरिंदर सिंह (आईएलसी में पूर्व अध्यक्ष) की देखरेख में काम किया, जहां उन्होंने लॉ अंडरग्रेजुएट्स को विजिटिंग फैकल्टी के रूप में एक कोर्स पढ़ाया और एक प्रशिक्षण संगोष्ठी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और विवाद समाधान का नेतृत्व किया। बाद में उन्होंने जर्मनी के बर्न विश्वविद्यालय से एलएलएम भी किया। इसके अलावा स्वाति ने डब्ल्यूटीआई और सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ स्टडीज द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित समर एकेडमी को पूरा किया है।
अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक के साथ काम करने का लक्ष्य
दुनिया की यात्रा करने की इच्छा रखने वाली स्वाति को कानून के अपने जुनून के अलावा, साहसिक खेल, मुक्केबाजी, घुड़सवारी और फोटोग्राफी भी पसंद है। स्वाति को डब्ल्यूटीआई के निदेशक की ओर से स्कॉलरशिप TRAIL+ कार्यक्रम में नामांकित है। स्वाति का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों या थिंक टैंक के साथ एक इंटरनेशनल ट्रेड और इन्वेस्टमेंट लॉयर के रूप में अपना करियर बनाना है। स्वाति अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के मुद्दों और संधि विकास पर काम करने के लिए सरकार के साथ चुनौतीपूर्ण पदों पर भी काम करने के लिए उत्साहित है।