संघ लोक सेवा आयोग ने हाल ही में सिविल सेवा परीक्षा 2020 का अंतिम परिणाम जारी किया था। इस साल, कुल 761 उम्मीदवारों ने सिविल सेवा परीक्षा पास की है। इन उम्मीदवारों में कई ऐसे भी हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी असाधारण तरीके से हिम्मत न हारते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया है। जिनके संघर्ष की कहानियां यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अनेक युवाओं को प्रेरणा देती हैं। ऐसी ही एक कहानी है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दिव्यांशु की।
सिविल सेवा परीक्षा 2020 में लखनऊ के रहने वाले 25 वर्षीय दिव्यांशु निगम ने 44वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर आईएएस अधिकारी बनने के अपने सपने को पूरा कर दिखाया है। दिव्यांशु के आईएएस बनने का यह सफर इतना भी आसान न था। काल चक्र उनकी राह में सबसे बड़ी अड़चन बनकर आया था, लेकिन वह उन्हें अपने लक्ष्य से डिगा नहीं पाया। जब दिव्यांशु अपने यूपीएससी इंटरव्यू की तैयारी कर रहे थे, उसी दौरान उनके पिता का आकस्मिक देहांत हो गया।
कोरोना ने छीनी पिता की जिंदगी
बिट्स पिलानी के गोवा कैंपस से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक दिव्यांशु निगम सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू की तैयारी अच्छे से कर रहे थे। इसी बीच, कोरोना महामारी के संक्रमण के कारण उनके पिता एसके निगम की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें लखनऊ के एसजीपीआई अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पिता की बिगड़ी सेहत ने दिव्यांशु की तैयारी पर भी असर डाला और उनके इंटरव्यू की तैयारी रुक सी गई थी। कुछ दिन भर्ती रहने के बाद उनके पिता फिर कभी अस्पताल से वापस नहीं लौट सके। जून 2020 में कोरोना ने उनके सिर से पिता का साया छीन लिया। दिव्यांशु के लिए यह सब किसी सदमे से कम नहीं था।
हिम्मत न हारते हुए खुद को संभाला
इस दुखद हादसे के बाद दिव्यांशु के लिए खुद को संभाल पाना आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने फिर से अपनी इंटरव्यू की तैयारी शुरू की। शायद यह दिव्यांशु के अथक परिश्रम और बुरे समय में भी कभी हार न मानने वाली जिद ही थी कि उन्होंने अपना इंटरव्यू बेहतरीन तरीके से दिया और परीक्षा में जीत का परचम लहराया।
पहले दो प्रयास में मुख्य परीक्षा में अटके
इससे पहले दिव्यांशु निगम सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में दो बार पास कर गए थे लेकिन मुख्य परीक्षा में विफल हो रहे थे। जब तीसरी बार उनका प्रयास कामयाब हुआ तो उनके पिता बेहद खुश हुए थे। लेकिन दिव्यांशु के आईएएस बनने से पहले ही दुनिया से चल बसे। हालांकि, अपने कठिन परिश्रम के दम पर उन्होंने तीसरे प्रयास में इस परीक्षा को पास किया और पूरे देश में 44वां स्थान प्राप्त किया।