एचआईवी पॉजीटिव होने के बावजूद भी इस महिला ने हार नहीं मानी। आज वो खुद तो बेहतर जिंदगी जी ही रही हैं साथ ही साथ अपनी तरह 54 एचआईवी पॉजीटिव अनाथ बच्चियों का जीवन भी संवार रही हैं। वो इन बच्चियों को एक मां की तरह प्यार करती है, तभी तो ये बच्चियां इन्हें मां कहकर बुलाती हैं।
एचआईवी पॉजीटिव दाक्षा पटेल 'गुजरात नेटवर्क ऑफ पीपल लिविंग विथ एचआईवी एड्स' की सेक्रेटरी हैं। ये संस्था जननी धाम चलाती है। 2009 में दाक्षा ने जननी धाम का शुभारंभ किया था। इसको गुजरात सरकार के सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट और सूरत के पी पी साहनी ग्रुप से सहायता मिल रही है। ये संस्था एचआईवी पॉजीटिव लड़कियों और महिलाओं के पुनर्वासन में उनकी मदद तो करती ही है साथ ही साथ उन्हें समाज में सिर उठाकर जीना भी सिखाती है। जननी धाम सूरत के बाहर बना हुआ है।
आज करीब 54 लड़कियां यहां रहती हैं। इसमें से 50 फीसदी अनाथ हैं। सभी दाक्षा को अपनी मां मानती हैं। चंदानी( बदला हुआ नाम) केवल 2 महीने की थी जब वो रेलवे स्टेशन के पास मेहसाना पुलिस को मिली थी। पुलिस ने चंदानी को दाक्षा को सौंप दिया और तब से वो जननी धाम में है। उसी के साल भर बाद दाक्षा ने चंदानी का दाखिला पास के स्कूल में करा दिया। अब वो पढ़ाई कर रही है और बेहतर भविष्य बनाने का सपना देख रही है।