उसके बाद तो मेरी खुशी की सीमा ही नहीं रही। मैंने सामाजिक न्याय विभाग के सचिव से संपर्क किया। उन्होंने मुझे सुझाया कि मैं उच्च अध्ययन के लिए किसी बेहतर एविएशन एकेडमी में दखिला करवाऊं, ताकि मुझे व्यावसायिक विमान चालक का लाइसेंस मिल सके और मैं अपने सपने पूरे कर सकूं।
विमानों का पायलट बनने के लिए व्यावसायिक लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होता है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के नियमों के मुताबिक, अभ्यर्थी को दो हजार घंटे विमान उड़ाने का सबूत पेश करना पड़ता है। यह सुनकर मैं बहुत उत्साहित हुआ, लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी बाधा थी फीस की।
जब मैंने अपनी इस समस्या का उनसे जिक्र किया, तो उन्होंने मुझे सुझाया कि ट्रांसजेंडर जस्टिस बोर्ड के माध्यम से मैं स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करूं। मैंने उनके बताए अनुसार आवेदन कर दिया, जो स्वीकृत भी हो गया। केरल सरकार ने मुझे अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए तेईस लाख से ज्यादा रुपये दिए हैं।
अगले कुछ ही हफ्तों में मैं राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन ऐंड टेक्नोलॉजी में दाखिला करवा कर प्रशिक्षण लेने वाला हूं। वहां तीन साल का कोर्स है। अगर मैंने यह कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया, तो मैं देश का पहला ट्रांसजेंडर पायलट बन जाऊंगा। मैं देश की सबसे बेहतरीन विमानन कंपनी में काम करना चाहता हूं।
मैं अपनी तरह का पहला व्यक्ति बनना चाहता हूं, ताकि मेरे समुदाय के दूसरे लोग भी प्रेरणा लेकर आगे बढ़ सकें। ट्रांसजेंडर समुदाय के अन्य लोगों के लिए मैं कहना चाहूंगा कि आप जो भी संघर्ष कर रहे हैं, निर्भयता पूर्वक करें, क्योंकि आपकी सहायता और आर्थिक मदद के लिए सरकार खड़ी है। और अगर कुछ नहीं हुआ, तो इतना समझ लें कि आप अकेले नहीं हैं।
(विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।)