एक बार मैं अपने परिवार के साथ महाबलीपुरम घूमने गई थी। मंदिर के पास मैंने कई वाहनों में विभिन्न देशों के झंडे देखे, पूछने पर पता चला कि कुछ देशों के पर्यटक हैं, जो रोमांचक यात्राएं करते हैं। मैंने ग्रुप के लोगों से बात करके उनसे जुड़ने और उनके साथ घूमने की इच्छा जताई, तो वे मान गए। यहीं से मेरा सफर शुरू हुआ। मैंने अकेले अपनी पहली यात्रा कैलाश मानसरोवर के लिए शुरू की। उस अनुभव ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। इस दौरान मैंने महसूस किया कि अब मैं किसी चीज से नहीं डरती।
हालांकि इन रोमांचक यात्राओं में कई मौके ऐसे आए, जब मैं डर गई। ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियल रीफ का अनुभव मैं कभी नहीं भूल सकती, जब एक वक्त के लिए लगा कि यह मेरी आखिरी यात्रा है। मैं लेडी इलियट आईलैंड पर पर डाइविंग के लिए गई थी। मैं कोई अनुभवी डाइवर नहीं थी, लेकिन मैं जिन फोटोग्राफर्स के साथ समुद्र की यात्रा कर रही थी, वह सभी लंबे समय से यह काम करते आ रहे थे। इंस्ट्रक्टर ने हमें बताया कि समुद्रतल 40 फीट गहरा है और तुम्हारे सिलेंडर में 50 मिनट तक के लिए ऑक्सीजन है।
ऐसे में जब मैं पानी की सतह पर आई तो देखा कि आसमान में काले बादल हैं और लहरों का प्रवाह बहुत तेज है। मुझे तैरते रहने में दिक्कत हो रही थी। लगभग एक घंटे तक किसी तरह पानी के अंदर-बाहर डुबकी लगाती रही, मुझे लगा यह मेरी आखिरी यात्रा है। मैं डूबने वाली हूं। तभी एक नाव आई, तब जाकर मेरी जान बची। एक बैगपैक और पासपोर्ट की बदौलत मैं अब तक साठ से ज्यादा देश घूम चुकी हूं।
यात्रा करने की शौकीन महिलाओं को मेरा सुझाव है कि हम अपनी सीमाएं खुद बनाते हैं। अगर आप बड़े सपने देखोगे, तो उन सभी जगहों पर जा सकते हो, जहां जाना चाहते हो। कई बार इसमें आप विफल भी होंगी, लेकिन हार मत मानो और न ही कभी रुको। यात्राएं आपको सिखाती हैं कि कैसे मुश्किल की घड़ी में अकेले आपको निपटना है।
(विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।)