दादा और पिता से मिली थी प्रेरणा
आदित्य बताते हैं कि इस परीक्षा में सफलता पाने का श्रेय दादा दादी और मां पापा को जाता है। बचपन में ही अपने दादा से इस क्षेत्रा में आने की प्रेरणा मिली थी और बचपन से ही दादा की पुलिस की ड्रेस पहन कर चला जाया करता था। फिर दादी भी कहा करती थी की मेरा पोता भी दादा की तरह पुलिस विभाग में जाएगा और दादा की तरह वर्दी पहनकर देश की सेवा करेगा। जिसके बाद से अलग क्षेत्र में जाने के बावजूद भी मेरे अंदर इस क्षेत्र में जाने का लक्ष्य पनप रहा था और फिर बीटेक करने के बाद इसमें लग गया और अब यह पूरा हो गया है। आज दादा दादी होती तो बेहद खुश होती, क्योंकि यह सपना उनका था। पिता ने इस दौरान फिजिकल टीचर के तौर पर मार्गदर्शन किया।
सेल्फ स्टडी को बताया सफलता की कुंजी
आदित्य ने बताया की सफलता का कोई शॉट कट नही होता है। इसके लिए धैय, लक्ष्य के प्रति समर्पण का भाव, निरंतर प्रयास और अभ्यास की मदद से ही किसी भी काम में सफल हुआ जा सकता है। दूसरे प्रतियोगी के लिए भी उन्होंने सफल होने का यही तरीका बताया।
नौकरी छोड़ पूरा किया दादा का सपना
आदित्य ने बीटेक करके नौकरी को छोड़ अपने दादा और पिता के सपनो को पूरा कर दिखाया है। खुद आदित्य मोहन कहते है कि उन्होंने इस कठिन परीक्षा में बिना किसी कोचिंग की मदद लिए सेल्फ स्टडी को आधार बनाया और सोशल मीडिया यूट्यूब से मदद लेकर पढ़ाई की।
मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई करने के बाद आदित्य ने इंजीनियरिंग करने के लिए प्रतिष्ठित संस्थान VIT का रुख किया और वर्ष 2020 में इलेक्टिकल इंजियरिंग से बीटेक किया, लेकिन मन में रेल पुलिस में कार्यरत अपने दादा के सपना को पूरा करने का जुनून पनप रहा था।
आदित्य ने बताया कि उन्होंने अपना पहला अटेम्प्ट वर्ष 2022 में लिया, जिसमे फिजिकल पास नही कर सके लेकिन अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार प्रयास जारी रखा। वर्ष 2023 में उन्होंने फिर से परीक्षा दी और इस बार रैंक-29 लाकर बतौर असिस्टेंट कमांडेंट के लिए चयनित हुए।