शिक्षकों की कमी और गुणवत्ता पर उठे सवाल
महामंडल की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, "(एनईपी में) यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कक्षा 6 से तीसरी भाषा शुरू की जानी चाहिए।"
इसमें तीसरी भाषा पढ़ाने की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया गया है, जब कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और उच्च कक्षाओं के छात्रों को कक्षा 2 के स्तर की मराठी पुस्तकें पढ़ने में भी कठिनाई होती है।
इसमें दावा किया गया है कि, "शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के बजाय, तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है।"
हालांकि राज्य सरकार ने यह प्रावधान किया है कि छात्र हिंदी के स्थान पर कोई अन्य भारतीय भाषा चुन सकते हैं, लेकिन यह व्यावहारिक रूप से असंभव होगा, क्योंकि इन भाषाओं के शिक्षकों को संबंधित राज्य से लाना होगा, जो बहुत कठिन है।
यह भी पढ़ें: राज ठाकरे का स्कूलों से आह्वान, बोले- सरकार की भाषा विभाजन की नीति का करें विरोध