क्या लिखा है पत्र में?
भाजपा सांसद ने अपने पत्र में लिखा है कि मैंने विगत 14 अगस्त को आपको एक पत्र लिखकर मांग की थी विभाजन की त्रासदी केवल स्मृति दिवस नहीं वरन अपने देश के नौनिहालों को सम्पूर्ण विभाजन की विभीषिका का तथ्यात्मक ज्ञान देने के लिये उनके पाठ्यक्रम में सम्मिलित करना चाहिए। उन्होंने आगे लिखा कि भारत विभाजन की विभीषिका मेरे ज्ञान के अनुसार विश्व इतिहास की सर्वाधिक क्रूरतापूर्ण घटना थी। जिसमे लगभग 10 लाख लोगों की जान गई। लगभग 70 लाख लोगों को अपना घर बार जमीन ज्यादा छोड़ना पड़ा और माताओं एवं बहन बेटियों की इज्जत लूटी गई। आपने स्वयं कहा कि विभाजन की पीड़ा को कभी नहीं भूला जा सकता। विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस प्रत्येक वर्ष मनाने से हमे भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर से खत्म करने के लिये न केवल प्रेरित करेगा बल्कि राष्ट्रीय एकता और मानवीय संवेदनाएं आदि भी मजबूत होंगी।
तथ्यात्मक साहित्य उपलब्ध नहीं
सांसद ने लिखा- इतिहास को याद रखने से भविष्य के लिये अतीत की गलतियों को पुनः न दोहराने की सीख मिलती है, और जो व्यक्ति समाज या राष्ट्र इतिहास की भूलों से सीख नहीं लेते वह बाद में पश्चाताप करते है। देश की अधिकांश आबादी का जन्म आजादी के बाद हुआ है, देश का विभाजन क्यों हुआ, विभाजन के पीछे पृष्ठभूमि क्या थी, विभाजन का दंश जो लाखों लोगों जो झेला वास्तव में उसकी हकीकत क्या थी, विभाजन के लिये कौन से लोग उत्तरदायी थे। लोगों के पास विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सटीक जानकारी देने के लिये कोई तथ्यात्मक साहित्य उपलब्ध नहीं है।
कुटिल मानसिकता वालों ने अपने दृष्टिकोण से लिखे तथ्य
सांसद ने कहा कि सत्य तो यह है कि हम अभी भी उन्ही ऐतिहासिक तथ्यों पर निर्भर है जो यूरोपीय अथवा देश के कुटिल मानसिकता वाले इतिहासकारों ने अपने दृष्टिकोण से लिखे हैं। यही कारण है कि इतिहास की पुस्तको में विभाजन के इतिहास की त्रासदी को दो - चार पक्तियों या एक दो पैरायाफ में समेट दिया जाता है। यह भी सत्य है कि इतिहास हमारे अतीत को जानने वर्तमान को समझने एवं भविष्य को सुधारने का सबसे सरल माध्यम होता है।
सम्पूर्ण चित्र इतिहास के पाठ्यक्रम में जोड़ा जाए
उन्होंने आगे लिखा कि उनकी दृष्टि में विश्व की सर्वाधिक क्रूरतम घटना का सम्पूर्ण प्रमाणिक ज्ञान भारत की वर्तमान व भविष्य की पीढ़ी को अवश्य होनी चाहिये। यह तभी सम्भव है जब विभाजन की विभीषिका का तथ्यात्मक सम्पूर्ण चित्र इतिहास के पाठ्यक्रम में जोड़ा जायेगा और बच्चों को पढ़ाया जायेगा। अतः वे पुनः निवेदन करते हैं कि विभाजन की विभीषिका को केवल स्मृति दिवस के रूप में नहीं, वरन बच्चों के इतिहास पाठ्यक्रम में जोड़ने के बारे में विचार करें।