रिपोर्ट में विदेश जाने वाले छात्रों की दिक्कतों को भी रेखांकित किया गया है। सबसे बड़ी दिक्कत है कि अधिकतर छात्र बिना होमवर्क के विदेश में दाखिला लेते हैं। उन्हें उच्च शिक्षा में संबंधित विश्वविद्यालय व पाठ्यक्रम की सही जानकारी नहीं होती। रहने, खाने से लेकर भाषा व संस्कृति को समझने की दिक्कत भी आती है।
पंजाब, तेलंगाना और महाराष्ट्र से सबसे अधिक छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। वर्ष 2022 में 13.24 लाख और वर्ष 2019 में करीब 10.9 लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए थे। यह खुलासा बियोंड बेड्स एंड बाउंड्रीज की हालिया इंडियन स्टूडेंट मोबिलिटी रिपोर्ट-2023 में हुआ है। अनुमान है कि वर्ष 2025 तक विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या 20 लाख पार कर जाएगी।
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रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब, तेलंगाना और महाराष्ट्र से करीब 12.5 फीसदी की दर से छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए हैं। गुजरात, दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु से 8-8 फीसदी, कर्नाटक से छह फीसदी व अन्य राज्यों से करीब 33 फीसदी छात्र विदेश गए हैं। हालांकि, अब उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों के रुझान में थोड़ा अंतर आया है।
पहले भारतीय छात्रों की पहली पसंद अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया व कनाडा थे, लेकिन अब उनका रुझान जर्मनी, किर्गिस्तान, आयरलैंड, सिंगापुर, रूस, फिलीपीन, फ्रांस और न्यूजीलैंड की तरफ बढ़ रहा है। वर्ष 2019-22 तक विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में करीब सात फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में विदेश जाने वाले छात्रों की दिक्कतों को भी रेखांकित किया गया है। सबसे बड़ी दिक्कत है कि अधिकतर छात्र बिना होमवर्क के विदेश में दाखिला लेते हैं। उन्हें उच्च शिक्षा में संबंधित विश्वविद्यालय व पाठ्यक्रम की सही जानकारी नहीं होती। रहने, खाने से लेकर भाषा व संस्कृति को समझने की दिक्कत भी आती है।
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स्नातकोत्तर डिग्री के लिए विदेश जाते हैं 60 % छात्र
विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों में 60 फीसदी स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने वाले हैं। 33 फीसदी छात्र स्नातक, जबकि सिर्फ दो फीसदी छात्र डिप्लोमा और पांच फीसदी प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन कोर्स की पढ़ाई करने के लिए जाते हैं।