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तकनीकी शिक्षा : असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य? सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

Mon, 05 Jul 2021 04:24 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

सुप्रीम कोर्ट में तकनीकी शिक्षा संस्थानों में एसोसिएट प्रोफेसर पदों के लिए पीएचडी अनिवार्य होने को चुनौती दी गई है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका के जरिये केरल उच्च न्यायालय के एक फैसले पर सवाल उठाया गया और तकनीकी संस्थानों में एसोसिएट प्रोफेसर पदों के लिए पीएचडी अनिवार्य होने को चुनौती दी गई है। हाल ही में शनिवार, 03 जुलाई, 2021 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल लीव पिटीशन पर नोटिस जारी किया है।  यह निर्णय अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, एआईसीटीई के नियमों के अनुसार 5 मार्च, 2010 के बाद से लागू किया गया था। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, केरल सरकार और तकनीकी शिक्षा निदेशक से जवाब मांगा है। 

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इस पूरे मामले में याचिकाकर्ता इंजीनियरिंग कॉलेजों में तीन एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया क्योंकि उन्हें लगा कि केरल उच्च न्यायालय के फैसले से उनका डिमोशन होगा। गौरतलब है कि जस्टिस कौल की अध्यक्षता वाली पीठ 03 दिसंबर, 2020 के उस फैसले की चुनौती पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने पाया कि केरल तकनीकी शिक्षा सेवा, 1967 (विशेष नियम) के लिए विशेष नियमों का नियम 6ए (ii) है, 5 मार्च 2010 के बाद लागू नहीं है। 2003 में जोड़ा गया यह नियम पीएचडी डिग्री प्राप्त करने के लिए सात साल का समय दे रहा था।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि विशेष नियमों के नियम 6ए (ii) की वैधता पर विचार करते हुए, 2016 में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे बरकरार रखा था। इस पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय को अधिक सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए था और समय-समय पर एआईसीटीई द्वारा जारी सभी नियमों की सराहना करनी चाहिए थी। हालांकि, अब सुनवाई के तहत मामले में सुप्रीम कोर्ट उन लोगों के मामलों को ध्यान में रख रहा है जिन्हें पिछले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पहले ही एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पदोन्नत किया जा चुका है। अब विचार यह करना है कि क्या इसे केरल उच्च न्यायालय के आक्षेपित निर्णय के आधार पर वापस किया जा सकता है।

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