इस परीक्षा के दौरान गुरुवार एक प्रथम वर्ष सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा में जाति से संबंधित प्रश्न पूछे जाने के बाद मामला गरमा गया है। इसे लेकर चहुंओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने के बाद पेरियार विश्वविद्यालय के कुलपति आर जगन्नाथन ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
तमिलनाडु का स्वतंत्रता आंदोलन विषय का था पेपर
दरअसल, गुरुवार, 14 जुलाई को आयोजित प्रथम वर्ष की परीक्षा में चार जाति विकल्पों के साथ "निम्न जाति कौन सी है जो तमिलनाडु से संबंधित है?" प्रश्न पूछे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। यह प्रश्न एमए इतिहास प्रथम वर्ष (द्वितीय सेमेस्टर) के छात्रों से पूछा गया था, जो ''तमिलनाडु का स्वतंत्रता आंदोलन : 1800 से 1947 तक'' विषय की अपनी परीक्षा दे रहे थे। हालांकि, कुलपति जगन्नाथन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
कुलपति बोले- हमने तैयार नहीं किया प्रश्न पत्र
इस मुद्दे पर बोलते हुए, पेरियार विश्वविद्यालय के कुलपति आर जगन्नाथन ने कहा कि उन्हें पेपर के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली। प्रश्न पत्र एक अन्य विश्वविद्यालय ने तैयार किया था। कुलपति ने कहा कि परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र पेरियार विश्वविद्यालय द्वारा तैयार नहीं किए जाते हैं। अन्य विश्वविद्यालय और कॉलेज के व्याख्याताओं ने प्रश्न पत्र तैयार किया था।
हम परीक्षा से पहले प्रश्न- पत्र नहीं पढ़ते
वाइस चांसलर ने कहा कि आमतौर पर, प्रश्न पत्र लीक से बचाने के लिए, हम परीक्षा से पहले प्रश्न- पत्र नहीं पढ़ते हैं। विवादास्पद प्रश्न के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं मिली। हम इसकी जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि हम परीक्षा नियंत्रक से रिपोर्ट मांग रहे हैं जिन्होंने प्रश्न पत्र सेट किया था। फिलहाल, हम दोबारा परीक्षा आयोजित करने पर विचार नहीं कर रहे हैं।