ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (ओयूपी) ने ‘एजुकेशन : द जर्नी टूवार्ड्स ए डिजिटल रिवॉल्यूशन’ नामक शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी ने अध्यापन और अध्ययन की डिजिटल तथा पारंपरिक विधियों को जोड़कर शिक्षा में ‘हाइब्रिड’ मॉडल की राह प्रशस्त की है।
लेकिन सरकारों को इस पर अभी और काम करने की जरूरत है, ताकि पिछले एक साल की प्रगति व्यर्थ न हो। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए इसमें भारत, ब्रिटेन, पाकिस्तान, ब्राजील, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की के विशेषज्ञों तथा साथ ही दुनियाभर से सैकड़ों शिक्षकों के अनुसंधान कार्य को शामिल किया है।
कोरोना महामारी से पिछले 12 महीने से अधिक वक्त में विश्व में 1.7 अरब से अधिक छात्र-छात्राओं के प्रभावित होने के बीच रिपोर्ट में यह विश्लेषण किया गया कि शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने शिक्षा प्रदान करने के नए तरीकों को किस प्रकार से अपनाया है।
‘एजुकेशन : द जर्नी टूवार्ड्स ए डिजिटल रिवॉल्यूशन’ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अन्य देशों की तुलना में ऑनलाइन शिक्षा तक पहुंचने का काम अपेक्षाकृत ठीक रहा और इसे 3.3/5 नंबर मिले। हालांकि, कई लोगों ने बड़े मुद्दों के रूप में डिजिटल शिक्षण उपकरणों तक पहुंच असमान होने और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी तथा ऑनलाइन शिक्षा से संबंधित जरूरी उपकरणों के बारे में जानकारी की कमी को चिह्नित किया।