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खुशखबर: अब आम छात्र भी विदेशी विवि में डिग्री प्रोग्राम की कर सकेंगे पढ़ाई, हफ्ते जारी होगी अधिसूचना

Wed, 20 Apr 2022 05:11 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

भारतीय और विदेशी संस्थानों के एक साथ मिलकर संयुक्त डिग्री प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की। इस संबंध में अधिसूचना इसी हफ्ते जारी कर दी जाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media
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विस्तार
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अब आम छात्र भी विदेशी विश्वविद्यालयों में मनपसंद डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई कर सकेंगे। दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2022-23 से भारतीय और विदेशी संस्थानों को एक साथ मिलकर संयुक्त डिग्री, ड्यूल डिग्री प्रोग्राम और ट्विन प्रोग्राम में पढ़ाई करने की अनुमति दे दी है।

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यूजीसी अध्यक्ष प्रो. एम जगदीश कुमार ने मंगलवार को भारतीय और विदेशी संस्थानों के एक साथ मिलकर संयुक्त डिग्री प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अधिसूचना इसी हफ्ते जारी कर दी जाएगी। भारत सरकार द्वारा जारी होने वाली एनआईआरएफ रैंकिंग के टॉप 100 और विश्व रैंकिंग (क्यूएस और टाइम्स हायर रैकिंग) के शीर्ष 1000 वाले संस्थान इस डिग्री प्रोग्राम का हिस्सा बन सकते हैं।

खास बात यह है कि इन डिग्री प्रोग्राम में छात्र को विदेशी विश्वविद्यालय से 30 फीसदी क्रेडिट स्कोर हासिल करने पर विदेशी विश्वविद्यालय की डिग्री मिल जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष प्रो. जगदीश कुमार के मुताबिक, भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान मिलकर ज्वाइंट डिग्री, ड्यूल डिग्री और टयूनिंग प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकेंगे।
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यूजीसी ने इन कार्यक्रमों के लिए नियमों को मंजूरी दे दी है। यह फैसला मंगलवार को उच्च शिक्षा नियामक की एक बैठक में किया गया।  प्रो  कुमार ने कहा कि भारतीय उच्च शिक्षण जिनके पास राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (नैक ) द्वारा जारी 3.01 स्कोर, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) की विश्वविद्यालय श्रेणी में शीर्ष 100 में शामिल या उत्कृष्ट संस्थान किसी भी ऐसे विदेशी संस्थान के साथ सहयोग कर सकता है।

इसमें विदेशी विश्वविद्यालय के पास टाइम्स उच्च शिक्षा या क्यूएस विश्व रैंकिंग के शीर्ष 1000 में शामिल होना जरूरी होगा। जो विश्वविद्यालय इन नियमों को पूरा करते होंगे, उन्हें इन प्रोग्राम को शुरू करवाने के लिए यूजीसी से पूर्व मंजूरी नहीं लेनी होगी।

ऑनलाइन-डिस्टेंस मोड से नहीं चलेंगे प्रोग्राम
यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि यह प्रोग्राम ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम और डिस्टेंस मोड से चलने वाले डिग्री प्रोग्राम में लागू नहीं होगा। यह पूरी तरह से फिजिकली क्लासरूम में चलने वाले प्रोग्राम होंगे। इसमें छात्र को तीनों प्रोग्राम के आधार पर विदेशी विश्वविद्यालयों में जाकर पढ़ाई का मौका भी मिलेगा। इसके अलावा इन प्रोग्राम में मेडिकल, लीगल और कृषि डिग्री प्रोग्राम शामिल नहीं किए जाएंगे।

सिर्फ 30 % कोर्स की पढ़ाई से मिलेगी डिग्री 
पहले विदेशी विश्वविद्यालय की डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करने के लिए छात्र को पूूूरी पढ़ाई विदेश में जाकर करनी पड़ती थी। इसमें लाखों रुपये की फीस और रहने-खाने का खर्चा अलग से होता है। ऐसे में अधिकतर छात्र चाहकर भी विदेशी विश्वविद्यालयों से डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई नहीं कर पाते थे। यूजीसी के इस नए नियम में महज 30 फीसदी कोर्स करके विदेशी विश्वविद्यालय की डिग्री पाने का मौका उपलब्ध है।


ऐसे होगा डिजाइन
ट्विन प्रोग्राम :
इसमें छात्र को कुछ कोर्स, एक, दो या तीन सेमेस्टर की पढ़ाई विदेशी विश्वविद्यालय में जाकर करनी होगी। यह एक तरह का स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम होगा। इसमें अधिक से अधिक 30 फीसदी कोर्स या क्रेडिट विदेशी विश्वविद्यालय से प्राप्त करने होंगे।
ज्वाइंट डिग्री : इसमें एक भारतीय और दूसरा विदेशी विश्वविद्यालय मिलकर डिग्री प्रोग्राम चलाएंगे। इसमें डिग्री भारतीय विश्वविद्यालय की होगी। उसमें दोनों विश्वविद्यालयों का नाम और लोगो होगा। इसमें कम से कम 30-30 फीसदी क्रेडिट दोनों विश्वविद्यालयों से प्राप्त करने अनिवार्य होंगे।
डयूल डिग्री :  एक भारतीय और दूसरा विदेशी विश्वविद्यालय डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवाएंगे। दोनों विश्वविद्यालय अलग-अलग डिग्री जारी करेंगे। इसमें भी दोनों प्रोग्राम में 30 या उससे अधिक क्रेडिट स्कोर हासिल करने होंगे।

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