नीट यूजी परीक्षा 2021 में दिव्यांग परीक्षार्थी को अतिरिक्त समय न देने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को परीक्षार्थी को राहत प्रदान करने का निर्देश दिया है। यह दिव्यांग छात्रा नीट यूजी 2021 की परीक्षा में अतिरिक्त समय की मांग कर रही थी। उसकी इस मांग को नकार दिया गया था।
जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस विक्रम नाथ के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि परीक्षा प्राधिकरण को दिव्यांग परीक्षार्थियों को अतिरिक्त समय देने के नियम का पालन करना चाहिए था। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के द्वारा दोबारा परीक्षा लेने की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने एनटीए को परीक्षार्थियों के साथ हुए भेदभाव की समस्या का कोई और हल निकानले को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका एक दिव्यांग छात्रा के द्वारा दायर की गई है। यह छात्रा डिस्ग्राफिया से पीड़ित है, यह तंत्रिका से संबंधित एक बिमारी है जिससे लिखने में समस्या पैदा होती है। छात्रा को नीट यूजी परीक्षा 2021 में नियमानुसार दिव्यांगों को मिलने वाला अतिरिक्त समय नहीं दिया गया था।
कोर्ट ने दो हफ्ते का समय दिया
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को इस मामले का समाधान निकालने के लिए दो हफ्ते तक का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले का उपाय न मिलना छात्रा के साथ अन्याय होगा। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि परीक्षा प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भाग सकता है।
नीट पीजी 2021 काउंसलिंग पर भी होनी है सुनवाई
नीट पीजी काउंसलिंग 2021 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10 फीसदी आरक्षण देने के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई इस याचिका में केंद्र और चिकित्सा परामर्श समिति (एमसीसी) के निर्देशों को चुनौती दी गई है। कोर्ट द्वारा इस मामले की सुनवाई 16 नवंबर को की जानी थी। कोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया था और 23 नवंबर की नई तारीख दी थी।
25 अक्तूबर को होने वाली थी काउंसलिंग
नीट पीजी काउंसलिंग 2021 पहले 25 अक्तूबर, 2021 से शुरू होने वाली थी। तब तक सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे का समाधान मांगे जाने तक इस पर रोक लगा दी थी। तब सुनवाई 16 नवंबर, 2021 के लिए निर्धारित की गई थी, लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से इसे आज के लिए टाल दिया गया।
केंद्र का आश्वासन
केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय को आश्वासन दिया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय से अनुमोदन प्राप्त होने तक काउंसलिंग शुरू नहीं करेगा, कई उम्मीदवार मांग कर रहे हैं कि सुनवाई जल्द शुरू होनी चाहिए। वे प्रवेश प्रक्रिया में देरी पर भी अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं और यह कैसे शैक्षणिक वर्ष की बर्बादी का कारण बन रहा है।