यहां से शुरू हुआ विवाद
नीट यूजी परीक्षा का रिजल्ट 4 जून को घोषित हुआ था। कार्यक्रम के अनुसार, परिणाम 14 जून को घोषित होना था, जोकि निर्धारित तिथि से 10 दिन पहले घोषित किया गया। परीक्षा में 1,563 उम्मीदवारों को "LOSS of TIME" क्राइटेरिया के तहत कृपांक प्रदान किए गए थे, जिसको लेकर बवाल मच गया। देशभर से एनटीए पर मनमाने ढंग से कृपांक प्रदान करने का आरोप लगने लगा।
एनटीए ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि कुछ केंद्रों पर परीक्षा के समय का नुकसान हुआ था, जिसकी भरपाई के लिए वहां के परीक्षार्थियों को मुआवजे के तौर पर कृपांक प्रदान किए गए।
एनटीए ने कहा, "एनटीए को एनईईटी यूजी 2024 से कुछ अभ्यावेदन और अदालती मामले प्राप्त हुए, जिनमें 5 मई, 2024 को परीक्षा के संचालन के दौरान समय की हानि की चिंता जताई गई। एनटीए ने ऐसे मामलों/अभ्यावेदनों पर विचार किया और सामान्यीकरण फॉर्मूला, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने 06 जून, 2018 के अपने फैसले के तहत तैयार और अपनाया है, को एनईईटी यूजी 2024 के समय की हानि का सामना किए जाने वाले उम्मीदवारों के लिए लागू किया गया।"
अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया। याचिकाओं की सुनवाई के बाद ग्रेस मार्क्स देने का फैसला वापस ले लिया गया। इसके साथ ही केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि इन उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा देने का विकल्प रखा जाएगा और जो उम्मीदवार परीक्षा में शामिल नहीं होगा काउंसलिंग के लिए सिर्फ उसके वास्तविक अंक ही मान्य होंगे।
30 जून को आएगा पुनःपरीक्षा का रिजल्ट
इस परीक्षा का रिजल्ट 30 जून को घोषित किया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया की काउंसलिंग पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होने वाली है।
1,563 उम्मीदवारों के लिए नीट परीक्षा का पुनः आयोजन 23 जून को किया गया। परीक्षा में 813 उम्मीदवार शामिल हुए।
सूत्रों ने क्या कहा?
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि "परीक्षा के समय की हानि" के लिए ग्रेस मार्क्स कभी भी आदर्श नहीं रहे हैं। समय की कमी की भरपाई के लिए, प्रारूप में समय बढ़ाने की सिफारिश की गई है, लेकिन कभी भी ऐसे ग्रेस मार्क्स की अनुमति नहीं दी जाएगी जो व्यक्तिपरक रूप से दिए गए हों।
नीट-यूजी में ग्रेस अंक पाने वाले 1,500 से अधिक छात्रों की पुनः परीक्षा, यूजीसी-नेट को रद्द करना तथा नीट-पीजी को इसके आयोजन से ठीक एक दिन पहले स्थगित करना - ये सभी बातें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली में खामियों की ओर इशारा करती हैं, ऐसा सूत्रों ने कहा है।
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि सरकार 2025 में परीक्षाओं का अगला चक्र शुरू होने से पहले एनटीए में हर महत्वपूर्ण सुधार को लागू करना चाहती है। केंद्र ने एनटीए के महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह के स्थान पर सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी प्रदीप सिंह खरोला को नियुक्त किया है। सूत्रों के अनुसार यह कदम एनटीए की विश्वसनीयता बचाने के लिए उठाया गया है।
एनटीए पर छात्रों का भरोसा कम हो गया है
शिक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा, "एनटीए उम्मीदवारों को आश्वस्त करने में विफल रहा। ग्रेस अंक देने का कोई प्रावधान नहीं है। यह पहली बार है जब उम्मीदवारों को ग्रेस अंक दिए गए हैं। नियमों के अनुसार, अगर कुछ समय का नुकसान होता तो उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए था। और फिर ऑड पद्धति के माध्यम से ग्रेस अंक दिए गए।"
एनटीए ने परीक्षा समय की हानि के कारण 1,564 उम्मीदवारों को ग्रेस अंक दिए थे। इसने कहा कि उसने उसी सामान्यीकरण फॉर्मूले का पालन किया जिसे 2018 में CLAT में सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी, जब ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी। एनटीए ने बाद में इन ग्रेस अंकों को वापस ले लिया।