एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने बुधवार को बताया कि हमें मंगलवार को एक शिकायत मिली कि इस्लामी कट्टरपंथी नाबालिगों पर शरिया और इस्लामी प्रथाओं को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं और स्कूल की पुरानी प्रार्थना को बदल दिया है। हमने जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया है और उनसे जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि गढ़वा के उपायुक्त रमेश घोलप को जांच शुरू करने और बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है, उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
नोटिस के मुताबिक लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी ने एनसीपीसीआर से शिकायत की है कि गढ़वा जिले में कुछ इस्लामिक कट्टरपंथी स्कूली बच्चों पर शरीयत और इस्लामी प्रथाएं थोपने की कोशिश कर रहे हैं। शिकायत के माध्यम से, आयोग को यह भी बताया गया है कि कट्टरपंथियों ने स्कूल की सदियों पुरानी प्रार्थना को जबरन बदलवा दिया है और बच्चों को प्रार्थना के दौरान हाथ नहीं जोड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिससे स्कूली बच्चों में दुश्मनी की स्थिति पैदा हो रही है।
मामले को लेकर राजनीति भी शुरू
झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि मैं पहले ही घटना की जांच के आदेश दे चुका हूं। चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, किसी को भी संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं है। वहीं, घटना का विरोध करते हुए, भाजपा ने दावा किया कि यह झामुमो के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार की कथित तुष्टीकरण नीति का परिणाम है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।