महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने मुम्बई के ऐसे स्कूल जो नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) 2021 में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, उनमें दिवाली की छुट्टियों को बढ़ाकर 22 नवंबर तक कर दिया गया है। वहीं मुम्बई के 292 स्कूल जो इस सर्वे में हिस्सा ले रहे हैं, उनकी कक्षाएं गुरुवार से शुरू हो गई हैं। शिक्षा विभाग ने इस बारे में एक नोटिस भी जारी किया है।
सरकार ने राज्य के स्कूलों में दिवाली की छुट्टियों में कटौती करते हुए इन्हें गुरुवार से शुरू करने के आदेश जारी किए थे। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाला छात्र सर्वे आज शुक्रवार को संपन्न हुआ। 3 नवंबर को जारी किए गए एक सर्कुलर के अनुसार राज्य ने दिवाली की शेष बची छुट्टियों को क्रिसमस और ठंड की छुट्टी में ए़डजस्ट करने का फैसला स्कूलों पर ही छोड़ दिया था। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र शिक्षा समिति के सचिव शिवनाथ दराडे ने कहा कि छात्र सर्वे में हिस्सा न लेने वाले स्कूलों को अभी शुरू करने का कोई भी औचित्य नहीं है।
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इस सर्वे के लिए स्कूलों को शत प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। परिजनों पर भी बच्चों को स्कूल भेजने का दवाब है। महाराष्ट्र में ग्रामीण क्षेत्रों में 5वीं से 12वीं और शहरी क्षेत्र में 8वीं से 12वीं तक के स्कूल खोले जा चुके हैं। छात्रों को स्कूल भेजने के लिए परिजनों की सहमति जरूरी है।
राज्य सरकार ने छात्रों को सर्वे के लिए ट्रेन से यात्रा करने की सहमति दे दी है। छात्रों के साथ आने वाले शख्स को भी पूरी तरह से टीकाकृत होना जरूरी नहीं है। सर्वे में शामिल होने वाले स्कूलों को प्रति कक्षा 30 छात्रों की उपस्थिति रखनी होगी। राज्य की स्कूल शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने बुधवार को सभी स्कूलों और छात्रों से इस सर्वे में शामिल होकर राज्य को टॉप रैंक दिलाने का निवेदन किया।
राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले छात्र सर्वे में भाषा, गणित और विज्ञान का एक टेस्ट होगा। इस सर्वे में देशभर के लगभग 39 लाख छात्र और 1.25 लाख स्कूल हिस्सा ले रहे हैं। इसमें उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा 15,302 स्कूल, मध्य प्रदेश के 9,499 स्कूल और महाराष्ट्र के 7,330 स्कूल शामिल हैं।इससे पहले दिल्ली के दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण 2021 (NAS 2021) को स्थगित करने का आग्रह किया था। सिसोदिया का तर्क था कि स्कूलों को फिर से खोलने की प्रक्रिया अभी शुरू हुई है और इस सर्वेक्षण के पीछे पैसा, समय और कौशल बर्बाद करने के बजाय, महामारी का प्रभाव झेल रहे छात्रों के मानसिक कल्याण की ओर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
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