शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने बुधवार को हई कैबिनेट बैठक के बाद बताया था कि केंद्र द्वारा सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ हुई बैठक में राज्य ने बारहवीं कक्षा की परीक्षा रद्द करने की पैरवी की थी। बैठक में हमने बच्चों के वैक्सीनेशन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया था। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा था कि बारहवीं कक्षा की परीक्षा पर एक समान नीति होनी चाहिए। कैबिनेट को केंद्र और अन्य राज्यों के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बारे में जानकारी दी गई है और अगले एक-दो दिन में बैठक होगी जिसमें बारहवीं कक्षा की परीक्षा को रद्द करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि सूबे में पहले ही दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया जा चुका है। दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पास किया जाएगा।
इस वर्ष बारहवीं कक्षा में 14 लाख विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। शिक्षा मंत्री के इस फैसले के बाद सभी विद्यार्थियों को फायदा होगा। गौरतलब है कि सीबीएसई के बाद हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान ने बारहवीं की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं।