प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा के विषय में लाखों बहनों भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। यह 14 अगस्त का दिन विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी।
आतंकवाद रोधी पाठ्यक्रम को लेकर निशाने पर
जेएनयू की ओर से यह फैसला ऐसे समय किया गया जब विश्वविद्यालय प्रशासन पहले से ही अपने आतंकवाद रोधी पाठ्यक्रम को लेकर निशाने पर है। गौरतलब की हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक नए पाठ्यक्रम काउंटर टेररिज्म को शामिल किया है। इसे लेकर छात्र नेताओं और शिक्षक नेताओं ने आपत्ति जताई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने भी इस पाठ्यक्रम पर सवाल उठाए हैं।
स्टूडेंट यूनियन और टीचर्स एसोसिएशन ने जताया विरोध
जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के उपाध्यक्ष साकेत मून ने इसे संघ विचारधारा को थोपने वाला बताया है। उन्होंने पाठ्यक्रम में जिहादी हिंसा जैसे शब्दों को शामिल करने पर आपत्ति जताई और इस पाठ्यक्रम को वापस लेने की मांग की है। वही जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने भी इस कोर्स पर आपत्ति जताई है और वापस लेने की मांग की। एसोसिएशन ने कहा कि यह पाठ्यक्रम उचित नहीं है। यह हिंदू और मुस्लिम छात्रों के बीच में वैमनस्य की भावना को बढ़ाएगा। यह फैसला अकादमिक से ज्यादा राजनीतिक और प्रोपेगेंडा से प्रेरित है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने किया फैसले का बचाव
हालांकि, इन सब प्रतिक्रियाओं के बीच जेएनयू के कुलपति प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने इस कोर्स का बचाव करते हुए कहा कि इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। पाठ्यक्रम की अकादमिक उपयोगिता को देखे बिना ही उस पर कन्ट्रोवर्सी खड़ी की जा रही है। वहीं, कोर्स को डिजाइन करने वाले जेएनयू के प्रोफेसर अरविंद कुमार ने कहा है कि एक पाठ्यक्रम किसी भी प्रकार से किसी मजहब, संप्रदाय विशेष की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाता है और इसे पूरी तरह अकादमिक दृष्टिकोण से तैयार किया गया है।