जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने परिसर के प्रतिबंधित क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन पर दंडित करने के लिए पिछले साल नवंबर में कड़े प्रतिबंध लगाने वाला एक मैनुअल जारी किया था, जिस पर विवाद खड़ा हो गया था। यह मैनुअल चीफ प्रॉक्टर ऑफिस (सीपीओ) की तरफ से जारी किया गया था उस समय एन जनार्दन मुख्य चीफ प्रॉक्टर थे।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने सीपीओ मैनुअल को रद्द करने की मांग की थी, जिसमें परिसर में धरना देने पर 20,000 रुपये और "देश-विरोधी" नारे लगाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया गया था।
जेएनयूएसयू ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, "छात्र समुदाय के एकजुट संघर्ष के बाद, प्रशासन द्वारा मुख्य प्रॉक्टर को बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि वह इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है और चाहते हैं कि पूरे मैनुअल को वापस लिया जाए।
हालांकि, जेएनयू प्रशासन ने इस बात से इनकार किया है कि नियुक्ति किसी भी तरह से छात्रों की मांगों से जुड़ी थी। इसमें कहा गया है कि एन जनार्दन राजू को पर्यावरण विज्ञान स्कूल के डीन के रूप में पदोन्नत किए जाने के बाद सुधीर कुमार को मुख्य प्रॉक्टर नियुक्त किया गया था।
जेएनयू की वाइस चांसलर शांतिश्री डी पंडित ने पीटीआई को बताया कि छात्रों की मांगों का नियुक्ति से कोई लेना-देना नहीं है। छात्रों ने अधिकारियों से मुलाकात की और उनसे लिखित में यह दिखाने के लिए कहा गया कि पुराने मैनुअल से क्या अलग है। अभी तक छात्रों की ओर से लिखित में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।