भारतीय संस्कृति के अनुसार यह दिन पूरे वर्ष का सबसे लम्बा दिन होता है यानी सूर्योदय से सूर्यास्त होने के बीच के समय का अंतराल सर्वाधिक होता है। इसी दिन से सूर्य की गति की दिशा दक्षिणायन होती है और सूर्य की यह दक्षिणायन स्तिथि योग के द्वारा आध्यात्मिक विधा प्राप्त करने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी गई है। 21 जून को ग्रीष्म ऋतु की संक्रान्ति भी कहा जाता है। यही कारण था कि इस दिन को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में चुना गया।
27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हमारे देश भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले अभिभाषण में इस पर पहल करते हुए प्रस्ताव रखा। जिसे महासभा ने तीन माह से भी कम समय में 11 दिसंबर 2014 को 193 देशों में से 177 देशों के समर्थन से पूर्ण बहुमत के साथ प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक अमूल्य उपहार है। यह मस्तिष्क और तन के बीच संतुलन का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और स्फूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर आपसी एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन-शैली में यह चेतना बनकर हमें मदद कर सकता है।
प्रत्येक वर्ष एक नई थीम के साथ यह उत्सव मनाया जाता है। इस साल की थीम बी विथ योग, बी एट होम अर्थात योग के साथ रहिए, घर पर रहिए तय की गई है। जबकि बीते वर्ष “घर में रहकर योग करें” थीम रखी गई थी। गौरतलब है कि विश्व योग दिवस का आधिकारिक नाम- अन्तररो योग दिवस है।
भारत में पहला विश्व योग दिवस 2015 अविस्मरणीय बना। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली के राजपथ पर मुख्य आयोजन हुआ था। 84 देशों के नागरिकों सहित रिकॉर्ड 35,985 लोगों ने इस उत्सव में भाग लिया था।