अभी कुछ दिन पहले यानी 31 अक्तूबर को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद औपचारिक रूप से देश का एक नक्शा जारी किया। इस नक्शे में उत्तराखंड और नेपाल के बीच स्थित कालापानी और लिपु लेख इलाकों को भारत के अंदर दिखाया गया है।
भारत की ओर से कहा गया है कि इसमें कुछ नया नहीं है। नया केवल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को एक राज्य के बजाय दो केंद्रीय प्रशासित इलाके दिखाए गए हैं। लेकिन नेपाल का दावा है कि कालापानी और लिपु लेख के ये इलाके इसके हैं।
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क्या कहा नेपाल और भारत ने
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज में कहा, "नेपाल सरकार बहुत स्पष्ट है कि कालापानी नेपाल का क्षेत्र है।"
इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, "हमारे नक्शे में भारत के संप्रभु क्षेत्र का सटीक चित्रण है और पड़ोसी के साथ सीमा को संशोधित नहीं किया गया है।"
उन्होंने कहा, "नए नक्शे में नेपाल के साथ भारत की सीमा को संशोधित नहीं किया गया है। नेपाल के साथ सीमा परिसीमन अभ्यास मौजूदा तंत्र के तहत चल रहा है। हम अपने करीबी और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के साथ बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को एकबार फिर दोहराते हैं।"
आखिर नक्शे में क्या बदला?
सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया के लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार के अनुसार इस साल का मैप पिछले सालों से केवल एक जगह अलग है और वो है जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में। क्यूंकि 31 अक्तूबर से ये दो केंद्रीय प्रशासित इलाके (Union Territory) बन गए हैं।
उनके अनुसार, "सीमा में एक मिलीमीटर का भी बदलाव नहीं किया गया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जो बदलाव हुआ है वही नया है। बाकी नक्शे में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जब भी कोई नया राज्य बनता है, जैसे कि 2014 में तेलंगाना बना, या कोई नया जिला बनता है तो हमें मैप में दिखाना पड़ता है।"
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लेकिन नेपाल के विदेश मंत्रालय का दावा है कि भारत ने ये नक्शा एक तरफा तरीके से जारी किया है और ऐसा करने का इसे कोई अधिकार नहीं।
क्या है कालापानी का इतिहास?
नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, "कालापानी एक विवादित इलाका है। इसे द्विपक्षीय रूप से हल करना होगा। एकतरफा संकल्प नेपाल को स्वीकार नहीं है। नेपाल ऐतिहासिक दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर कूटनीतिक रूप से इस मुद्दे को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
नेपाल का दावा है कि कालापानी और लिपु लेख को उसने तत्कालीन ईस्ट इंडिया कंपनी से एक समझौते के अंतर्गत हासिल किया था।
लेकिन सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया गिरीश कुमार कहते हैं, "ये हमने एकतरफा तरीके से प्रकाशित नहीं किया है। हम हर साल नक्शा निकालते हैं। आप 2018 या इससे पहले का नक्शा देख लीजिए। कालापानी भारत में नजर आएगा।"
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नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, ''भारत ने 1962 में चीन से हुए युद्ध के बाद अपनी सभी सीमा चौकियों को नेपाल के उत्तरी बेल्ट से हटा लिया था, लेकिन कालापानी से नहीं। वहीं, लिपु लेख को लेकर 2014 में विवाद शुरू हुआ, जब भारत और चीन ने नेपाल के दावे का विरोध करते हुए लिपु लेख के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार गलियारे का निर्माण करने पर सहमति जताई थी। नेपाल ने ये मुद्दा चीन और भारत दोनों से उठाया था। लेकिन इस पर कभी औपचारिक रूप से चर्चा नहीं हो सकी।''