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Independence Day 2024: आजादी से अब तक, देश में कितना बदली शिक्षा प्रणाली? जानिए क्या बदलाव हुए

Thu, 15 Aug 2024 12:16 AM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Independence Day 2024: आजादी के बाद से देश ने हर क्षेत्र में काफी तरक्की की। देश का विकास सीधे-सीधे वहां की शिक्षा प्रणाली से प्रभावित होता है। आइए जानते हैं कि आजादी के बाद से अब तक शिक्षा के क्षेत्र में क्या काम हुआ।
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आजादी से अब तक कितनी बदली शिक्षा प्रणाली? - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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Independence Day 2024:  आज देश की आजादी के 77 साल पूरे हो गए। इस लगभग आठ दशक के सफर में देश लगातार विकास की राह पर अग्रसर रहा है। इस दौरान हर सेक्टर में तरक्की देखने को मिली। किसी भी देश की वृद्धि और विकास वहां की शिक्षा प्रणाली से सीधे-सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में इस खास मौके पर हम जानेंगे कि पिछले 77 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में देश में क्या बड़े बदलाव हुए।

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साक्षरता दर में बदलाव

देश की आजादी के समय साक्षारता दर 18 फीसदी के आसपास थी। 1951 में यह 18.33% थी। तब देश में केवल 9% महिलाएं साक्षर थीं। देश की समग्र साक्षरता दर 1951 में 18.33% से बढ़कर 2001 में 65.38% हो गई, जिसमें पुरुष साक्षरता दर 75.65% और महिला साक्षरता दर 54.16% थी। वहीं, 2011 की जनगणना के अनुसार, देश की साक्षरता दर 74.04% थी।

जनगणना 2021 के अनुसार, भारत की साक्षरता दर 74.04% है। जनगणना 2021 के अनुसार पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% और महिलाओं की 65.46% है।

एजुकेशन फॉर ऑल का नारा

देश की आजादी के बाद एजुकेशन फॉर ऑल का नारा दिया गया था। इसके लिए शिक्षा विभाग की स्थापना हुई। इसे बाद में मानव संसाधन मंत्रालय में बदल दिया गया। साथ ही हर राज्य में शिक्षा विभाग स्थापित कर शिक्षा के क्षेत्र की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की गई।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की स्थापना

तकनीकी शिक्षा को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार संस्थान अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की स्थापना 1945 में भारत सरकार द्वारा सलाहकार निकाय के रूप में की गई थी। 1987 में यह एक वैधानिक निकाय बन गया। यह तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा के लिए मान्यता प्राप्त और अनुमोदित संस्थान है।

एनसीईआरटी की स्थापना

शिक्षा की गुणवत्ता को मद्देनजर रखते हुए साल 1961 में एनसीईआरटी की स्थापना हुई। 1968 में कोठारी शिक्षा आयोग की सिफारिशों के अनुसरण में प्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपनाई गई और 1975 में 6 वर्ष तक के बच्चों के उचित विकास के लिए समेकित बाल विकास सेवा योजना की शुरुआत हुई। 1986 नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाया गया जिसे 1992 में आचार्य राममूर्ति समिति द्वारा समीक्षा के आधार पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कुछ बदलाव किए गए।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी)

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एक वैधानिक निकाय है जो भारत में विश्वविद्यालयों को मान्यता प्रदान करता है। यह पात्र विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है। यूजीसी की स्थापना 1956 में हुई।

सर्व शिक्षा अभियान

नवंबर 2000 से केंद्र सरकार द्वारा ‘सर्व शिक्षा अभियान’ की शुरुआत हुई। इस अभियान में 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। 2009 में इसे मौलिक अधिकार (शिक्षा का अधिकार) बना दिया गया, जिससे हर बच्चे को पढ़ने का हक मिला।

मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की गई

हर गांव में आंगनवाड़ी की स्थापना हुई। यहां पर शिक्षा के साथ संतुलित भोजन देने की पहल की शुरूआत हुई। सरकारी स्कूलों में बच्चों को सरकार द्वारा मध्याह्न भोजन वितरित करने की योजना शुरू की गई।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुई इन संस्थानों कि स्थापना

आजादी के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कई बदलाव हुए। आईआईटी, एम्स और आईआईएम जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों की स्थापना की गई। आजादी के बाद ही 6 भारतीय प्रबंध संस्थान व 9 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान को स्थापित किया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति

2020 में एक नई शिक्षा नीति लाई गई। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति कहा गया। इस नीति के तहत स्कूलों में क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई पर फोकस रहने के साथ 5+3+3+4 मॉडल को अपनाया गया है।
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उच्च शिक्षा के बारे में

आजादी के बाद के वर्षों में उच्च शिक्षा क्षेत्र की संस्थागत क्षमता में अत्यधिक वृद्धि हुई है। विश्वविद्यालयों की संख्या वर्ष 1950 में 20 थी, जोकि बढ़कर 2018 में 850 हो गई। 14 नवंबर 2023 तक, यूजीसी द्वारा प्रकाशित केंद्रीय विश्वविद्यालयों की सूची में 56 केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल हैं।

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थय मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में जानकारी दी कि देश में मेडिकल कॉलजों की संख्या बढ़कर 731 हो गई है। वहीं देश में आईआईटी की संख्या 23 है।

भारत में शिक्षा प्रणाली को वास्तव में प्रभावी माने जाने से पहले अभी लंबा रास्ता तय करना है। हालांकि, सरकार और विभिन्न अन्य संगठनों द्वारा स्थिति को सुधारने के लिए कई पहल की जा रही हैं। समय और प्रयास के साथ, यह आशा की जाती है कि भारत में अंततः एक ऐसी शैक्षिक प्रणाली होगी जो अपने सभी नागरिकों की जरूरतों को पूरा करेगी।
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