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उपलब्धि : आईआईटी-मद्रास ने विकसित किया नया तरीका, भूकंप का सटीक पता लगाएगा

Fri, 12 Nov 2021 09:59 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक अहम तकनीक विकसित की है। आईआईटी-एम की रिसर्च टीम ने भूकंप के कारण होने वाली तबाही से बचाने के लिए भूकंप का सटीक पता लगाने की तकनीक विकसित की है।
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भूकंप के बारे में जानकारी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक अहम तकनीक विकसित की है। आईआईटी-एम की रिसर्च टीम ने भूकंप के कारण होने वाली तबाही से बचाने के लिए भूकंप का सटीक पता लगाने की तकनीक विकसित की है। आईआईटी की टीम ने प्रारंभिक चेतावनी संकेतों को डिटेक्ट करने के बाद 30 सेकंड से 2 मिनट के भीतर भूकंप का सटीक पता लगाने और चेतावनी उपायों को लॉन्च करने के लिए एक नई एप्रोच तैयार की है। 

शोधकर्ताओं ने ने गुरुवार को दावा किया कि यह लीड टाइम है, भूकंप के दौरान अगर समय से कुछ मिनट पूर्व भी चेतावनी मिल सके तो असंख्य मानव जीवन को बचाने के लिए परमाणु रिएक्टरों, मेट्रो जैसे परिवहन साधनों या यहां तक कि ऊंची इमारतों में लिफ्ट को बंद करने के लिए इतना समय पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि एप्रोच का उपयोग अन्य डोमेन में फॉल्ट और आइसोलेशन का पता लगाने के लिए भी किया जा सकता है। पी-वेव आगमन की जानकारी घटना के अन्य स्रोत मापदंडों जैसे मेग्नीट्यूड, डेप्थ और एपिकसेंटर को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है।
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भूकंप - फोटो : self
आईआईटी, मद्रास के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अरुण के तंगीराला के मार्गदर्शन में शोध कर रहे रिसर्च स्कॉलर कंचन अग्रवाल के अनुसार, पी-वेव डिटेक्शन समस्या का एक मजबूत और सटीक समाधान है, जो घटना के विवरण का सही अनुमान लगाने और भूकंप या अन्य भूकंप जनित घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक है।  
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आईआईटी मद्रास - फोटो : सोशल मीडिया
परमाणु ऊर्जा विभाग के एक सलाहकार निकाय, परमाणु विज्ञान अनुसंधान बोर्ड द्वारा आंशिक रूप से वित्त पोषित इस शोध के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर प्रकाश डालते हुए, प्रो तंगीराला ने कहा कि प्रस्तावित ढांचा भूकंपीय घटनाओं का पता लगाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य डोमेन में गलती का पता लगाने और अलगाव के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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भूकंप की तीव्रता - फोटो : AMAR UJALA
इसके अलावा, ढांचा मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग मॉडल सहित किसी भी प्रीडिक्टिव मॉडल को शामिल कर सकता है, जो समय-श्रृंखला विश्लेषण, संकेतों के बहु-स्तरीय विश्लेषण, सिस्टम पहचान और अन्य क्षेत्रों के बीच अनुमान सिद्धांत का पता लगाने में मानवीय हस्तक्षेप को कम करेगा। इस शोध के निष्कर्ष ओपन एक्सेस वैज्ञानिक पत्रिकाओं पीएलओएस वन में प्रकाशित हुए थे।  
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इंडोनेशिया- सुमात्रा द्वीप पर ज्वालामुखी - फोटो : twitter
प्रस्तावित ढांचे का एक और सकारात्मक पहलू यह है कि एक बार पता चलने के बाद यह पी-वेव पुनर्निर्माण की सुविधा प्रदान करता है। साथियों द्वारा इस पहलू का पता नहीं लगाया गया है। इसमें कहा गया है, मुख्य रूप से समुद्र में लहरों, पृथ्वी की पपड़ी में बदलाव, वायुमंडलीय विविधताओं और मानवीय गतिविधियों के कारण जमीन लगातार अशांति की स्थिति में है। भूकंपीय संकेत या तो प्राकृतिक (भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, सुनामी, आदि) या मानव निर्मित (भारी यातायात, परमाणु विस्फोट, खनन गतिविधि, आदि) स्रोतों से उत्पन्न हो सकते हैं।
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tsunami
स्रोत चाहे जो भी हो, सभी भूकंपीय घटनाएं अपने पैमाने के अनुपात में ऊर्जा छोड़ती हैं। यह जारी ऊर्जा सभी दिशाओं में एक लहर के रूप में बाहर निकलती है और एक भूकंपीय संकेत के रूप में एक भूकंपीय संकेत के रूप में दर्ज की जाती है। सीस्मोग्राम एक भूकंपमापी से प्राप्त जमीनी कंपन गति की रिकॉर्डिंग है। इन सीस्मोग्राम का विश्लेषण पृथ्वी की गतिविधि को समझने और भूकंप के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करने, स्रोत स्थानों का निर्धारण करने और अन्य भूकंपीय घटनाओं के स्रोत का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भूकंप के हानिकारक हिस्से का पता लगाना या भविष्यवाणी करना जीवन की रक्षा और संपत्ति के नुकसान को रोकने में बहुत महत्वपूर्ण है।
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