इस परियोजना के तहत आईआईटी खड़गपुर के परिसर में तीन जल उपचार संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसकी मदद से अपशिष्ट जल का उपचार किया जा सकेगा और उसे सिंचाई में प्रयोग करने योग्य बनाया जा सकेगा।
संस्थान के ‘आदित्य चौबे सेंटर फॉर री-वॉटर रिसर्च’ के प्रोफेसर मकरंद घांगरेकर ने बताया कि संयंत्र जनवरी 2020 से शुरू हो जाएंगे।
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आईआईटी खड़गपुर के अलावा इस परियोजना के अन्य साझीदार भारतीय संस्थान हैं- आईआईटी मद्रास, आईआईटी भुवनेश्वर, आईआईटी रुड़की, एनआईटीआईई मुंबई, एमएनआईटी जयपुर और टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज। इन संस्थानों में भी पानी के उपचार के लिए सात ऐसे संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।