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आईआईटी गुवाहाटी ने ड्रॉपलेट्स के भाप बनने की प्रक्रिया को तेज करने का खोजा नया तरीका

Thu, 18 Feb 2021 09:32 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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शोध की रिपोर्ट रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री की पत्रिका ‘सॉफ्ट मैटर’ में प्रकाशित की गई। - फोटो : अमर उजाला
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी), गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने ड्रॉपलेट्स के भाप बनने की प्रक्रिया को तेज करने का एक नया तरीका खोज निकाला है। इसका उद्देश्य सस्पेंडेड नैनोपार्टिकल्स वाले ड्रॉपलेट्स के जीवनकाल को नियंत्रित करना है। इस शोध की रिपोर्ट रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘सॉफ्ट मैटर’ में प्रकाशित की गई है।  

शोध में पता चला है कि सस्पेंडेड नैनोपार्टिकल्स चुंबकीय रूप से सक्रिय होते हैं, जिसकी वजह से वे मैग्नेटिक फोर्स वाले वातावरण में नियंत्रित रहते हैं। शोध में यह भी देखा गया है कि मैग्नेटिक फील्ड की मौजूदगी में दो ड्रॉपलेट्स के मिश्रण की प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है। 

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आईआईटी गुवाहाटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के असिसटेंट प्रोफेसर, प्रणब कुमार मोंडल बताते हैं कि जिन परिस्थितियों में कोई भी बाहरी बल का प्रयोग नहीं किया जाता है उनके मुकाबले इस विधि में ड्रॉपलेट्स के मिश्रण की प्रक्रिया में लगने वाले समय में तकरीबन 80 प्रतिशत की वृद्धि होती है।

कुमार कहते हैं, बायोमेडिकल डायग्नॉस्टिक्स के क्षेत्र में फ्लूइड्स का तेजी से और अच्छे तरीके से मिलना अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में इस शोध के परिणाम उनके लिए काफी मददगार साबित होंगे। इसके साथ ही इस शोध में यह भी पता चला है कि मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल सस्पेंडेड मैग्नेटिक नैनोपार्टिकल्स वाले ड्रॉपलेट्स का जीवनकाल बदलने में उपयोग किया जा सकता है। 

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टीम के अनुसार, शोध से यह भी सामने आया है कि अप्लाइड मैग्नेटिक फील्ड में परिवर्तन कर ड्रॉपलेट्स के भाप बनने के दर को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है। इस शोध के परिणामों का दूरगामी प्रभाव बायोमेडिकल इंजीनियरिंग से लेकर सरफेस पैटर्निंग तक पढ़ सकता है।  

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