कलामसैट बनाने वाले स्टूडेंट्स के साथ इसरो अध्यक्ष के. सिवन
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20 अप्रैल 2009 में अनुसैट के बाद कॉलेज / विश्वविद्यालय छात्रों द्वारा बनाए गए कौन-कौन से उपग्रह कब-कब अंतरिक्ष में भेजे गए, इसकी पूरी जानकारी नीचे दी जा रही है।
1. स्टुडसैट (STUDSAT)
- अनुसैट के बाद छात्रों द्वारा बनाया गया दूसरा उपग्रह स्टुडसैट (STUDSAT) था, जिसे इसरो ने अंतरिक्ष में भेजा।
- यह उपग्रह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के सात इंजीनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों द्वारा मिलकर बनाया गया था।
- एक किलोग्राम से भी कम वजन वाले इस उपग्रह को 12 जुलाई 2010 को कार्टोसैट-2बी से लॉन्च किया गया।
- इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में स्पेस टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना था।
2. एसआरएमसैट (SRMSat)
- इसे एसआरएम यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स और फैकल्टी ने मिलकर तैयार किया था।
- इसका उद्देश्य वातावरण में प्रदूषण के स्तर और ग्लोबल वॉर्मिंग के कारणों का पता लगाना था।
- 10.9 किलोग्राम वजनी इस उपग्रह को 12 अक्टूबर 2011 को मेघा ट्रॉपिक्स से लॉन्च किया गया था।
3. जुगनू (JUGNU)
- यह एक नैनो-सैटेलाइट (सूक्ष्म उपग्रह) था, जिसे आईआईटी कानपुर के छात्रों ने इसरो के मार्गदर्शन में तैयार किया था।
- करीब 3 किलोग्राम वजन वाले इस उपग्रह को 12 अक्टूबर 2011 को एसआरएमसैट के साथ ही मेघा ट्रॉपिक्स से लॉन्च किया गया था।
- इसका काम खुद के बनाए कैमरे से पृथ्वी की तस्वीरें लेना, जीपीएस रिसीवर और अंतरिक्ष में एमईएमएस आधारित इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट का परीक्षण करना था।
4. सत्यभामासैट (SATHYABAMASAT)
- चेन्नई की सत्यभामा यूनिवर्सिटी के छात्रों ने यह उपग्रह बनाया था।
- इसका काम ग्रीन हाउस गैसों (कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डायऑक्साइड, मीथेन, हाइड्रोजन फ्लोराइड) के बारे में आंकड़े एकत्रित करना था।
- 1.5 किलोग्राम वजनी इस उपग्रह को 22 जून 2016 को कार्टोसैट-2 सीरीज से लॉन्च किया गया था
5. स्वयं (SWAYAM)
- स्वयं पुणे स्थित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों द्वारा बनाया गया उपग्रह था।
- इसका काम था HAM कम्युनिटी को प्वॉइंट टू प्वॉइंट मैसेज भेजने की सेवा प्रदान करना।
- एक किलो वजन वाले इस उपग्रह को 22 जून 2016 को कार्टोसैट-2 सीरीज के जरिए सत्यभामासैट के साथ ही अंतरिक्ष में भेजा गया था।
इसरो अब तक छात्रों द्वारा तैयार 10 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा है। जनवरी 2019 में जब कलामसैट को अंतरिक्ष में भेजा गया, तब इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने कहा था कि 'भारत के सभी छात्रों के लिए इसरो के दरवाजे खुले हैं। आप हमारे पास अपने उपग्रह लेकर आएं और हम उसे आपके लिए लॉन्च करेंगे। चलिए...हम भारत को एक वैज्ञानिक देश बनाते हैं'।
इसलिए, अगर आपने भी ऐसा कोई उपग्रह बनाया है तो बिना संकोच किए उसके बारे में इसरो को बताएं। देश के कई होनहार छात्रों द्वारा बनाए इस कीर्तिमान में आपका नाम भी जुड़ सकता है।