दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि अब दिल्ली गैस चैंबर बनी हुई है। शुक्रवार को दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता 729 दर्ज की गई। यह स्थिति आपातकालीन स्थिति है जो सभी के लिए बेहद खतरनाक है। सिर्फ दिल्ली ही नहीं नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद व आसपास के अन्य इलाकों में भी स्थिति ऐसी ही है।
छात्रों की पढ़ाई का नुकसान
प्रदूषण के प्रकोप से बच्चा-बुजुर्ग कोई नहीं बच पाया है। प्रदूषण के चलते पहले दिल्ली-एनसीआर के स्कूल पांच नवंबर तक बंद रहे। इसके बाद 14-15 नवंबर को प्रदूषण का स्तर बढ़ने के चलते फिर स्कूलों की छुट्टी की गई। अब शनिवार को स्कूल दोबारा से खुलने जा रहे हैं। ऐसा तब है जब प्रदूषण की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। हर कोई बच्चों की सेहत को लेकर चिंता में है, पर एक पहलू ऐसा भी है जिसपर कोई गौर नहीं कर रहा है। वो है इन अनियोजित छुट्टियों से होने वाली पढ़ाई का नुकसान।
कोर्स पूरा कराना चुनौती
ये तो लाजमी है कि अनियोजित छुट्टियों के चलते कोर्स छूट जाएगा और परीक्षाएं तो पूर्व निर्धारित शेड्यूल के हिसाब से ही होगी। ऐसे में तय समय में कोर्स खत्म कराना, छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए ही एक चुनौती होगा। इस बारे में जानने के लिए अमर उजाला ने कुछ शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों से बात की।
एक सरकारी स्कूल की अध्यापिका ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि प्रदूषण के चलते हमारे स्कूल में कई बच्चों को स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं। कुछ बच्चों ने सुबह प्रार्थना के समय सांस लेने में दिक्कत, उल्टी और सिर दर्द की शिकायत की है। ऐसे में छुट्टियां ही एकमात्र हल नजर आता है। बेशक छुट्टियों से कोर्स पूरा कराने में समस्याएं सामने आएंगी, पर ये बच्चों के स्वास्थ्य से बढ़कर नहीं है।